नागरत्ना ने इसे न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया, जो चुपचाप उन जजों के अधिकार को कमज़ोर कर रही है जो ऐसे फैसले सुनाते हैं जिन्हें बाद में पलट दिया जाता है। न्यायाधीश ने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह की प्रथा से संस्था में जनता का विश्वास डगमगाने का खतरा है।