एजेंट से बीमा कराया है या कराने जा रहे हों, तब थोड़ा सावधान हो जाएं। सस्ती और अच्छी इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर आप फर्जीवाड़े का शिकार भी हो सकते हैं। दरअसल, इस साल की शुरुआत में महाराष्ट्र के मुंबई में ऐसा गिरोह दबोचा गया था, जिसने करीब दो साल में 800 से ज्यादा लोगों को फर्जी बीमा (मोटर) पॉलिसी बेची थी। ऐसे में अगर बीमा के जुड़ी कुछ अहम बातों का ख्याल रखेंगे तो आप इन जालसाजों के झांसे में आने से बच सकते हैं। जानें, ऐसी ही महीन बातें:
– अनजान नंबरों से आने वाले फोन कॉल्स पर कॉलर खुद को एजेंट बताए तो यूं ही यकीन न करें। नई पॉलिसी लेने या फिर उसे रिन्यू कराने में आकर्षक डिस्काउंट का लोभ दें, तब और सतर्क रहें। साथ ही किसी भी स्थिति में उन्हें अपने निजी डिटेल्स मसलन आधार, पैन, डीएल नंबर आदि न मुहैया कराएं।
– ऐसे गिरोह पॉलिसी के फर्जी कागजात से लेकर उन पर मुहर तक जाली लगाते हैं और कंपनी से जुड़े एजेंट होने का दावा करते हैं। एक न्यूज वेबसाइट को सेक्योरनाऊ डॉट इन के सह-संस्थापक कपिल मेहता ने बताया, “नकली पॉलिसी जारी करने के भारी संख्या में मामले होते हैं।”
– किसी भी हालत में पॉलिसी का प्रीमियम खुद को एजेंट बताने वाले शख्स के खाते में न जमा कराएं। अगर शक हो तो फौरन संबंधित बीमा कंपनी के नजदीकी दफ्तर में पॉलिसी डिटेल्स के आधार पर उसका स्टेटस जान लें कि वाकई में वह रनिंग मोड में या फिर उस नाम से कोई निवेश हुआ ही नहीं।
– पॉलिसी के बारे में बीमा कंपनी की वेबसाइट से लेकर उसकी कस्टमर केयर हेल्पलाइन पर भी संपर्क साधकर इस बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है।
– एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीक और स्मार्टफोन के जमाने में फर्जीवाड़ा बढ़ा है, तो उस पर नकेल कसने के विकल्प भी बढ़े हैं। लोगों में पहले के मुकाबले जागरूकता भी बढ़ी है। आजकल बीमा पॉलिसी के साथ क्यू आर कोड (QR Code) भी आता है, जिसकी मदद से पॉलिसी डिटेल्स हासिल किए जा सकते हैं। आप उसे आसानी से ट्रैक कर सकते हैं।

