बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय के प्रस्ताव से न सिर्फ उनके बैलेंस शीट अौर बैंकिंग प्रणाली पर असर पड़ेगा, बल्कि ग्राहकों को भी थोड़ी परेशानी उठानी पड़ेगी। ग्राहकों को अपनी पूरी डिटेल एक बार फिर से अपडेट करानी होगी। ग्राहकों को एक नया अकाउंट नंबर और कस्टमर आईडी मिल सकती है। ऐसे में जरूरी है कि उनका अपना ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर अपडेट हो ताकि नए अकाउंट के लिए तत्काल ऑफिशियल नोटिफिकेशन मिल सके। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के पास विजया बैंक और देना बैंक दोनों में खाता है, तब दोनों अकाउंट के लिए एक सिंगल कस्टमर आईडी दिया जाएगा। यह भी संभव है कि नई यूनिट में ग्राहकों के लिए कुछ और सुरक्षा फीचर जोड़ा जा सकता है। पीडब्लूसी इंडिया रिस्क इंश्योरेंस पार्टनर विवेक अय्यर कहते हैं, “हालांकि, एक ही बैंक के साथ कई खातों में ग्राहकों की आईडी कॉमन होगी। ज्वाइंट होल्डर के लिए एक अलग आईडी बनाई जा सकती है ताकि वे केवल उस खास खाते का संचालन कर सकें।”
जिन ग्राहकों को नया खाता संख्या या आईएफएससी कोड अलॉट किया गया है, उन्हें थर्ड पार्टी के साथ अपना डिटेल अपडेट करना होगा। इन थर्ड पार्टी में टैक्स रिफंड के लिए आयकर विभाग, मैच्यूरिटी इनकम प्राप्त करने के लिए बीमाकर्ता, रिडेम्प्शन राशि प्राप्त करने के लिए म्यूचुअल फंड और राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (एनपीएस ) व अन्य शामिल है। आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिल कुमार सिंह कहते हैं, “ग्राहक अपने पॉलिसी खाते के माध्यम से ऑनलाइन तरीके से अपना अकाउंट डिटेल अपडेट कर सकते हैं या खाता अपडेट फॉर्म जमा करने के लिए शाखा में जा सकते हैं।”
विलय करने वाली इकाई को सभी इलेक्ट्रॉनिक समाशोधन सेवा (ईसीएस) और पोस्ट-डेटेड चेक को वैल्यू देना होगा। ग्राहक अपने बैंक, फंड हाउस और बीमा कंपनियों के साथ पूछताछ करें और यदि आवश्यक हो तो नया ईसीएस मैनडेट जारी करें। आपको ईसीएस मैनडेट फॉर्म ऑनलाइन या अपनी शाखाओं के माध्यम से भरना होगा। एसआईपी के लिए ऑटो-डेबिट के मामले में आपको नया एसआईपी रजिस्ट्रेशन -सह-मैनडेट फॉर्म जमा करना पड़ सकता है। लोन ईएमआई के लिए भी ऐसा ही करना होगा। ग्राहकों को आम तौर पर 6-12 महीने के लिए बैलेंस चेक और मौजूदा चेक बुक का उपयोग करने की अनुमति दी जाती है।
विलय के बाद कई पुराने ब्रांच बंद भी हो सकते हैं। इसलिए ग्राहकों को नए आईएफएससी कोड और एमआईसीआर कोड पर ध्यान रखना होगा। कस्टमर वाइस के एडवाइजर गोपाल रवि कुमार कहते हैं, “एसबीआई एसोसिएट्स-एसबीआई विलय के मामले में खाता संख्याएं नहीं बदलीं, लेकिन होम ब्रांच बदल दी गई थी और एक नया शाखा कोड लागू हुआ था।”

