आज (26 जनवरी, 2017) से ठीक 67 साल पहले भारत ने 1950 ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया था। तब से हर साल 26 जनवरी के दिन प्राचीन काल से चली आ रही भारत की अनूठी एकता में पिरोई विविधताओं वाली विरासत, आधुनिक युग की विभिन्न क्षेत्रों की उसकी उपलब्धियां और देश की सुरक्षा की गारंटी देने वाली फौज की क्षमता का भव्य प्रदर्शन नई दिल्ली के राजपथ पर किया जाता है। मगर क्या आप जानते हैं कि भारत के पहले गणतंत्र दिवस की परेड कैसी रही थी? तीनों सेनाओं के 3000 अधिकारियों और पुलिस ने परेड में हिस्सा लिया था। उस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए लगभग 15,000 लोग इकट्ठा हुए थे। दिल्ली की सड़कों से होकर भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जुलूस निकला तो भारत माता की जय के नारे लगते रहे। इरविन एम्फीथियेटर (अब मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम) तक काफिला पहुंचते-पहुंचते हर गली से जयकारे लगते रहे।
पुराने किले के बैकग्राउंड में एम्फीथियरेटर में सैनिकों के मार्च को देखकर रौंगटे खड़े हो जाते हैं। बिना किसी सुरक्षा कवर के विजय चौक पर सवारी करते राजेंद्र प्रसाद इस ऐतिहासिक दिन के गवाह बने थे। इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे। इस आर्काइव वीडियो में भारत के पहले गणतंत्र दिवस की चुनिंदा झलकियां हैं। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भी वीडियो में अपने अलहदा अंदाज में नजर आ रहे हैं।
देखें वीडियो:
(हम वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करते।)
गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि अबु धाबी के शहजादे मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान थे। परेड में यूएई के सैनिकों की एक टुकड़ी ने अपने देश के ध्वज के साथ हिस्सा लिया जिसमें उसका संगीत बैंड शामिल था । यूएई के दस्ते में 149 जवान शामिल थे जिसमें 35 संगीतकार हैं। सलामी मंच पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मौजूदगी में राजपथ पर गुरुवार (26 जनवरी) को भारत की संस्कृति के रंगों और रक्षा क्षेत्र की ताकत का प्रदर्शन किया गया।
परेड में जहां सारी दुनिया में सबसे अधिक विभिन्नता वाले देश भारत को एक सिरे में पिरोने वाली उसकी हर कोने की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाया, वहीं अत्याधुनिक हथियारों, मिसाइलों, विमानों और भारतीय सैनिकों के दस्तों ने देश के किसी भी चुनौती से निपट सकने की ताकत का अहसास कराया।

