टेनिस स्‍टार सानिया मिर्जा कई बार इस्‍लामिक कट्टर‍पंथियों की आलोचना का शिकार हुई हैं। बुर्का न पहनने को लेकर उन्‍हें सोशल मीडिया पर खासी आलोचना झेलनी पड़ी थी। एक टीवी कार्यक्रम में मुस्लिम मौलवी साजिद रशीद ने सानिया के पहनावे को ‘गैर-इस्‍लामिक’ बताया है। जी न्‍यूज के कार्यक्रम ‘फतह का फतवा’ में मौलवी ने कहा, ”जब खेलों के उसूल ऐसे हैं कि उनको कहा जाता है कि आप पर्दे के साथ नहीं खेल सकतीं तो हम कैसे इजाजत दे देंगे। इस्‍लाम इजाजत नहीं देता। ह‍म अपनी बेटियों को बेपर्दा नहीं करना चाहते। वे कुश्‍ती लड़ने के लिए नहीं बनी हैं।” साजिद रशीदी ने कहा, ”मोहम्‍मद साहब ने 1,400 साल पहले कहा था कि एक जमाना आएगा जब लोग लिबास पहनकर भी नंगे दिखाई देंगे। मतलब लोग इतने चुस्‍त कपड़े पहनेंगे कि जिस्‍म के सारे हिस्‍से नजर आएंगे। बस इस्‍लाम इसको मना करता है। आप ऐसा लिबास पहनिए जिससे आपके हिस्‍से छिप जाएं।”

रशीदी यही नहीं रुके। जब शो के होस्‍ट तारिफ फतेह ने बॉलीवुड फिल्‍म दंगल का उदाहरण देते हुए पूछा कि ‘दंगल में जो दो बच्चियां इंडिया का नाम रोशन कर रही थीं, क्‍या वह वहां कुछ गलत कर रही थीं?’ तो रशीदी ने जवाब दिया, ”इस्‍लाम तो फिल्‍म के खिलाफ है। मोबाइल फिल्‍म बनाने के लिए नहीं है। फिल्‍म गुनाह करने के लिए बनाई जाती है। आजकल समाज में जो बुराइयां हैं, वह फिल्‍मों की वजह से है, जो नंगापन है, वह फिल्‍मों की वजह से हैं।” रशीदी ने आगे कहा, ”मैंने कभी फिल्‍म नहीं देखी। टीवी पर न्‍यूज देखना कोई गुनाह नहीं है। पूरी दुनिया से बाख़बर होना गुनाह नहीं है।”

रशीदी ने कहा कि ‘बुर्का इस्‍लामी लिबास नहीं है।’ उन्‍होंने पैनल पर मौजूद महिला से कहा कि ‘मेरे पास छड़ी है, मैं इलाज कर दूंगा। बदतमीजी पर आएंगी न तो मैं आपसे ज्‍यादा बदतमीज हो सकता हूं। बदतमीज औरत। औरत हैं तो नाजायज फायदा उठाएंगी।” रशीद ने महिलाओं के लिए इस्‍लामिक कानून की ‘व्‍याख्‍या’ करते हुए कहा कि ”औरत के लिए सिर्फ जरूरत के वक्‍त में हथेली खोलने की इजाजत है, चेहरे का भी पर्दा है।”

रशीदी ने सानिया के लिबास पर टिप्‍पणी करते हुए कहा, ”आप सानिया मिर्जा को बढ़ावा दे रहे हैं, आप सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान को सर्टिफिकेट देना चाहते हैं। इस्‍लाम में इसकी इजाजत नहीं है।”

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https://youtu.be/cLOYlwRxTqI

https://youtu.be/_YTZpOU0uDY