पिछले कुछ दिनों से दिख रहा है कि वंदेमातरम गाने पर बवाल बढ़ता जा रहा है। जहां कुछ संगठन सरकारी संस्थाओं मे वंदेमातरम को अनिवार्य करवाने में लगे हुए हैं तो वहीं एक धर्म विशेष के लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। उत्तराखंड सरकार के एक मंत्री ने रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज में बयान तक दे डाला कि अगर उत्तराखंड में रहना है तो वंदेमातरम कहना होगा। वहीं इसका विरोध करने वाले कह रहे हैं कि कुछ भी हो जाए हम वंदे मातरम नहीं कहेंगे। इसी मुद्दे पर एक लाइव टीवी डिबेट शो में दो मौलवी आपसे में भिड़ गए। एक ने कहा कि मुसलमानों को वंदेमातरम बोलने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए तो वहीं दूसरे मौलवी ने गुस्से भरे अंदाज में कहा कि आप कौन होते हैं मुसलमानों की बात करने वाले। आप तो मोदी और योगी के रंगे हुए मुसलमान हैं।

दरअसल हिंदी न्यूज चैनल आज तक पर ये डिबेट चल रही थी कि क्या वंदेमातरम कहना ही होगा। इस मुद्दे पर बहस के लिए गरीब नवाज फाउंडेशन के अध्यक्ष मौलाना मंसूर रजा, AIUC के अध्यक्ष मौलाना नदीमुद्दीन और AISPLB के प्रवक्ता यासूब अब्बास मुसलमान मेहनाों के तौर पर मौजूद थे। मौलाना नदीमुद्दीन ने कहा कि किसी को भी वंदेमातरम कहने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि आजादी की लड़ाई में हिंदू मुसलमान दोनों धर्मों के लोग इस नारे के साथ अंग्रेजों को देश से भगाने में लगे हुए थे।

मौलाना नदीमुद्दीन की बात से गरीब नवाज फाउंडेशन के अध्यक्ष मौलाना मंसूर रजा को थोड़ी आपत्ति हुई लेकिन एंकर ने उन्हें चुप करा दिया। अब AISPLB के प्रवक्ता यासूब अब्बास से एंकर ने उनकी राय पूछी। यासूब अब्बास ने अपनी बात रखते हुए कहा- मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है। अगर हम अल्लाह को मानते हैं तो सभी भगवान और धर्म बराबर हैं। वंदे मातरम कहने में कौन सा इस्लाम को नुकसान हो रहा है। यासूर अब्बास की बात सुनते ही मौलाना अंसार रजा का पारा चढ़ गया। उन्होंने यासूब अब्बास पर आरोप लगाते हुए कह दिया कि आप कहां से बोल रहे हैं ये सबको पता है। आप पर मोदी और योगी का रंग चढ़ गया है। अंसार रजा की बात से यासूब अब्बास भी उनसे भिड़ गए। किसी तरह से शो की एंकर ने मामले को शांत करपाया और बहस को आगे की तरफ ले गईं।