पाकिस्तान मूल के कैनिडियाई लेखक तारिक फतह अक्सर अपनी बातों के कारण सुर्खियों में रहते हैं। पिछले दो दिनों से वो ट्विटर पर जबरदस्त तरीके से छाए हुए हैं। कारण है दिल्ली में उर्दू साहित्या फेस्टिवल जश्न ए रेखता में उनके साथ हुआ दुर्व्यवहार। तारिक अपने कुछ साथियों के साथ रविवार शाम को इस कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्हें वहां देखकर कुछ लोग भड़क गए और उन्होंने तारिक के खिलाफ नारे लगाए और मारपीट करने की भी कोशिश की हालांकि पुलिस के वहां मौजूद होने के कारण उन्हें सुरक्षित वहां से निकाल लिया गया। लेकिन अब ये सारा मसला ट्विटर पर खूब ट्रोल किया जा रहा है। इसी विवाद के बीच में मशहूर पत्रकार तुफैल अहमद ने अपने एक ट्वीट में उर्दू भाषा पर ही कमेंट करते हुए उसे सांप्रदायिक बता दिया। जिसे बाद में तारिक फतह ने भी रिट्वीट किया।

उर्दू भाषा पर किए गया ये कमेंट पर मशहूर गीतकार जावेद अख्तर को पसंद नहीं आया और उन्होंने तुफैल और तारिक को जवाब देते हुए ट्वीट किया। दरअसल इस बहस की शुरुआत तुफैल अहमद के ट्वीट से हुई जिसमें उन्होंने तारिक फतह पर हुए हमलो को उर्दू अतिवादियों की कार्रवाई बताया। साथ ही इसे इस्लामिक कट्टरता से जोड़ दिया। इसके जवाब में जावेद अख्तर ने ट्वीट करके कहा कि संघ और वीएचपी से जुड़े लोग हिंदी बोलते हैं तो क्या हिंदी सांप्रदायिक हो जाएगी। इसके जवाब में तारिक ने ट्वीट किया और लिखा कि अगर हिंदी बंगाल पर उसी प्रकार थोपी जाए जैसी उर्दू थोपी गई थी तो निश्चित ही हो जाएगी। इसके बाद तारिक ने उर्दू को विभाजन से जोड़ दिया जवाब में जावेद अख्तर ने लिखा कि इकबाल को जोड़कर उर्दू के सारे शायर प्रगतिशील थे। उर्दू के विभाजन के पीछे कारण होने या सांप्रदायिक होने को लेकर एक के बाद एक ट्वीट किए गए। अंत में हालांकि जावेद अख्तर ने तारिक फतह पर हुए हमले के निंदा की जिसके बाद ये मामला शांत हो गया।

https://twitter.com/tufailelif/status/833900359932321796

https://twitter.com/tufailelif/status/833988918278234112

https://twitter.com/tufailelif/status/833988033846374400

https://twitter.com/tufailelif/status/833988918278234112