Republic Day 2026: हर साल 26 जनवरी की सुबह पूरा देश अपनी टीवी स्क्रीन के सामने दिल्ली में होने वाली गणतंत्र दिवस की भव्य परेड देखने के लिए अति उत्साहित होता है। आसमान में गरजते लड़ाकू विमान, कदम से कदम मिलाते सैनिक और भारत की संस्कृति की झांकियां देखकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। लेकिन पिछले कई सालों से देखा गया है कि इन झांकियों के साथ एक विवाद जुड़ा हुआ है। जिन राज्यों की झांकी परेड में दिखाई जाती है, वो खुश दिखते हैं, वहीं जिन राज्यों की झांकी परेड में शामिल नहीं हो पातीं, उनकी तरफ से केंद्र पर आरोप लगाए जाते हैं। हाांकि, झांकियों को शामिल करने के लिए कुछ नियम होते हैं। उन्हीं के आधार पर झांकियों को परेड में शामिल किया जाता है।

गणतंत्र दिवस की जो भी झांकियां निकलती हैं, उनका सीधा अप्रूवल रक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाता है, यानी कि सरकार से इसका सीधा वास्ता होता है। लेकिन ये भी सच है कि रक्षा मंत्रालय द्वारा एक विशेष कमेटी का गठन किया जाता है जिसमें आर्ट, कल्चर, पेंटिंग, स्कल्पचर, म्यूजिक, आर्किटेक्चर की फील्ड लोग होते हैं। जो भी राज्य अपनी झांकी को शामिल करवाना चाहता है, वो अपना प्रस्ताव इस कमेटी को भेजता है।

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कैसे किया जाता है झांकी का चयन?

किसी भी झांकी को उसके विषय, डिजाइन, विजुअल इंपैक्ट के आधार पर चेक किया जाता है। इसके ऊपर भी कई और पैरामीटर रहते हैं, जिन्हें देखा जाता है। जिन भी झांकियों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है, उन्हें फिर तय समय के अंदर उन झांकियों का एक थ्री डी मॉडल कमेटी को पेश करना होता है। ये प्रक्रिया से 6 से 7 राउंड वाली रहती है, यानी कि नाम अंत तक फाइनल नहीं होता है।

बाद में भी जिन झांकियों को परेड के लिए हरी झंडी दी जाती है, रक्षा मंत्रालय की तरफ से उन्हें एक ट्रैक्टर और एक ट्रेलर मुहैया करवाता है। अगर कोई राज्य चाहे तो वो अपनी तरफ से कोई अन्य वाहन का इस्तेमाल भी कर सकता है, लेकिन उसकी मंजूरी भी रक्षा मंत्रालय की तरफ से ही जाती है।