नागरिकता संशोधन कानून ( CAA ) के विरोध में पिछले 2 महीनों से देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली के शाहीन बाग में भी महिलाएं सड़क पर हैं। शाहीन बाग का प्रदर्शन सीएए विरोध का केंद्र बना हुआ है। शाहीन बाग में महिलाओं के इसी प्रोटेस्ट पर हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार असगर वजाहत की एक टिप्पणी वायरल हो रही है। कुछ लोग असगर वजाहत की बातों का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ लोग उनके विरोध में उतर आए हैं।
दरअसल असगर वजाहत ने 11 फरवरी को एक पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने शाहीन बाग की महिलाओं पर टिप्पणी की। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा- दो-तीन दिन पहले अपने मित्र प्रोफेसर एस. के. जैन के साथ शाहीन बाग़ गया था। वहां मैंने महिलाओं को बैठे हुए देखा। बड़ी खुशी हुई कि भारत के संविधान को बचाने के लिए महिलाएं इतनी तकलीफ उठा रही हैं। लेकिन यह भी मन में आया कि अगर ये महिलाएं केवल बैठी न रहतीं बल्कि कुछ करती होतीं, जैसे बर्फीले पहाड़ों पर तैनात भारतीय सिपाहियों के लिए स्वेटर या दस्ताने बुनती होतीं तो शायद और अच्छा होता है।
असगर वजाहत की इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लोग लिख रहे हैं कि कुछ घृणित लोगों ने शाहीन बाग की महिलाओं का भाव लगा कर अपमानित किया। लेकिन जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष श्री असगर वजाहत जी ने तो उन महिलाओं को लगभग आराम तलब या निठल्ली ही कह दिया। यह उन शानदार महिलाओं का अपमान नहीं तो और क्या है?
कुछ अन्य लोग लिख रहे हैं कि, ‘जिन महिलाओं के पक्के इरादों और हौसलों से निकले आंदोलन ने एक ताकतवर और अहंकारी सत्ता समूह की आपराधिक और सांप्रदायिक चुनावी रणनीति का पूरा तानाबाना उधेड़ कर रख दिया, उनसे ‘खाली न बैठकर स्वेटर बुनने’ की बात कहना नासमझी ही कही जाएगी।’
॥ शाहीन बाग़ की स्त्रियाँ ॥
(असग़र वजाहत के लिए)बैठी नहीं,
खड़ी हैं
ख़ाली नहीं,
भरी हैं
अब बुनेंगी नहीं,
उधेड़ेंगी।✦ अजंता देव #ShaheenBaghProtest#IndiaAgainstCAA_NRC_NPR
— lakhani sajjad (@___sajjad___) February 13, 2020
असगर वजाहत ने बिला वजह अपनी फजीहत करवा ली सलाह देने की इतनी ही जरूरत थी, तो सभी आंदोलन कारियों को चरखा चलाने की सलाह दे देते। चरखे में एक संदेश होता.
— Saroj kumar Mishra (@sarojmishra20) February 13, 2020
क्यों आज ये वजा़हत ज़रूरी है
के अदीब बडे़ ही अजीब होते हैं
रहते हैं आदमखोरों के साथ भी
असगर और अजगर करीब होते हैं#इस्लाम_शेरी@pawanraj_singh@johar65 @Margrtmacwan @Munaf_Ali @Shishir_Som @khalidsalmani1— Islam_Sheri (@islamhussain055) February 12, 2020
वहीं असगर वजाहत के समर्थन में लोग लिख रहे हैं कि उन्हें जिस तरह और जिस भाषा के साथ ट्रोल किया जा रहा है, इससे साफ पता चलता है कि वाम बुद्धिजीवियों ने अपने विवेक और सोच-विचार को तहखाने में डाल उस पर जड़-बुद्धि का ताला जड़ दिया है।
असगर वजाहत साहब को जिस तरह और जिस भाषा के साथ ट्रोल किया जा रहा है, इससे साफ पता चलता है कि वाम बुद्धिजीवियों ने अपने विवेक और सोच-विचार को तहखाने में डाल उस पर जड़-बुद्धि का ताला जड़ दिया है। खैर…।
— Anshu Mali Rastogi (@anshurstgi) February 13, 2020
