वरिष्ठ पत्रकार और बीजेपी के राज्य सभा सांसद स्वप्न दासगुप्ता और वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के बीच नोंकझोंक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। वीडियो में सांसद स्वप्न दासगुप्ता बरखा एवं उनके समान विचार वालों को”पोस्ट-ट्रूथ” शब्द के इस्तेमाल को लेकर आड़े हाथों लिया है। दासगुप्ता ने कहा कि जब जनता बरखा दत्त जैसे लोगों की सोच के उलट फैसला सुनाती जा रही है तो ऐसे लोग इसे “पोस्ट-ट्रूथ” बताने लगे हैं।  ये वीडियो पिछले महीने राजस्थान के जयपुर में हुए साहित्य महोत्सव जेएलए के दौरान हुई एक परिचर्चा का है। वीडियो में मंच पर गीतकार प्रसून जोशी और कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी मौजूद दिख रहे हैं।

“पोस्ट-ट्रूथ” को ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी ने ‘साल 2016 का शब्द’ चुना था। ऑक्सफोर्ड के अनुसार “पोस्ट-ट्रूथ” वह स्थिति है जब जनता वस्तुनिष्ठ सत्य से ज्यादा निजी विश्वासों और भावनाओं पर यकीन करने लगती है। यह शब्द पहली बार तब सुर्खियों में आया जब ब्रिटेन की आम जनता ने यूरोपीय संघ से अलग होने का फैसला किया जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने जनता से इसके उलट अपील की थी। यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के फैसले के पीछे “पोस्ट-ट्रूथ” को वजह माना गया। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप के जीतने को भी “पोस्ट-ट्रूथ” माना गया।

वीडियो में स्वप्न दासगुप्ता कह रहे हैं, “प्रसून जोशी ने पूछा कि “पोस्ट-ट्रूथ” शब्द कितने लोगों ने सुना है? मैं इस सवाल को थोड़ा घुमाकर पूछना चाहूंगा। कितने लोगों ने “पोस्ट-ट्रूथ” शब्द दो साल पहले सुना था?” जब केवल एक आदमी ने भीड़ में से हाँ में हाथ मिटाया तो स्वप्न दासगुप्ता ने व्यंग्य करते हुए कहा, “केवल एक..बहुत अच्छा है आपके लिए सर!” दासगुप्ता ने कहा कि ट्रूथ (सच) और “पोस्ट-ट्रूथ” का हव्वा मीडिया का खड़ा किया हुआ है।

स्वप्न दासगुप्ता ने बरखा दत्त द्वारा “पोस्ट-ट्रूथ” पर की गयी टिप्पणी पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा, “पिछले डेढ़ सालों में क्या बदला है?” दासगुप्ता ने बरखा पर कटाक्ष करते हुए कहा, “कुछ लोगों को लगता था कि सच और ज्ञान पर उनका कब्जा है।” दासगुप्ता ने कहा कि जब ऐसे लोग ब्रिटेन में ब्रेक्जिट (यूरोपीय संघ से निकलने) पर उनसे सहमत नहीं हुई तो ऐसे लोग उसे “पोस्ट-ट्रूथ” बताने लगे।   दासगुप्ता के कटाक्ष पर बरखा ने कहा, “मॉडरेटर पर हमला मत कीजिए। मैं स्पीकर नहीं हूं इसलिए मैं आपका जवाब नहीं दे पाऊंगी।” बरखा के टोकने के बावजूद दासगुप्ता ने उनकी खिंचाई जारी रखी।

बरखा की आलोचना करते हुए दासगुप्ता ने कहा कि “मेरी दोस्त बरखा दत्त को लगता है कि वो अमेरिकी जनता से ज्यादा जानती हैं कि उन्हें क्या चाहिए। “दासगुप्ता ने बरखा द्वारा डोनाल्ड ट्रंप समर्थक जाली खबरों के तीन करोड़ ट्वीट किए जाने का हवाला देने पर कटाक्ष करते हुए कहा, “आप भी तो 13 साल से एक आदमी को मास मर्डर कहती आ रही हैं। जब भारत के लोगों ने उसे प्रधानमंत्री चुन लिया तो आप कहने लगीं ये “पोस्ट-ट्रूथ” है।

जब बरखा ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप समर्थक जाली खबरों के तीन करोड़ ट्वीट की बात उन्होंने नहीं स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोध में कही गयी है तो बरखा ने उन्हें लाजवाब करेत हुए कहा, “यही स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी चुनाव से पहले कर रही थी कि 99 प्रतिशत चांस है कि हिलैरी क्लिंटन जीतेंगी।” दासगुप्ता ने कहा कि जब आम जनता ने “दुनिया भर के हारे हुए लोगों” की सोच से उलट फैसला किया तो ये उसे “पोस्ट-ट्रूथ” कहने लगे। ये कहने लगे कि जनता को बरगलाया गया है। दासगुप्ता ने कहा, “भारत अमेरिकी, और ब्रिटेन की आम जनता को नहीं बस स्टैनफोर्ड के प्रोफेसर और उनके जैसे लोग जानते हैं कि ट्रूथ क्या है!”

दासगुप्ता ने बरखा पर निशाना साधते हुए ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल से जुड़ा एक किस्सा भी साझा किया। दासगुप्ता ने कहा कि एक बार चर्चिल ने एक किताब लिखी तो ब्रिटेन के एक वरिष्ठ राजनेता ने उस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “विंस्टन ने अपने ऊपर किताब लिखी है लेकिन उसका नाम वर्ल्ड क्राइसिस (विश्व संकट) रखा है।”

देखिए स्वप्न दासगुप्ता का वीडियो-