ट्विटर पर हर समय किसी ना किसी मुद्दे पर जंग जैसी स्थिति बनी रहती है। इस माहौल में किसी को नीचा दिखाने का कोई मौका कोई भी अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता है। इस चाह में कई बार भाषा बेहद तल्ख हो जाती है तो कई बार झूठ का सहारा भी लिया जाता है। ऐसा ही एक वाक्या मंगलवार को ट्विटर पर देखने को मिला। कश्मीरी मूल के फिल्म निर्माता और सेंसर बोर्ड के सदस्य अशोक पंडित ने जेएनयू की स्टूडेंट और जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन की पूर्व उपाध्यक्ष शहला राशिद के लिए बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। दरअसल शहला राशिद ने महिलाओं पर आधारित किसी फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) द्वारा बैन करने का आरोप लगाया गया, जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ। शहला राशिद ने अपने ट्वीट में लिखा- “सीबीएफसी ने एक फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया क्योंकि वह “महिला-उन्मुख” (महिलाओं पर आधारित) थी। सीबीएससी को पहलाज निलानी और अशोक पंडित जैसे मूर्ख संघी चलाते हैं।”

 

https://twitter.com/Shehla_Rashid/status/838577381174566912

https://twitter.com/ashokepandit/status/838579609838874624

शहला राशिद के इसी ट्वीट पर फिल्म निर्माता अशोक पंडित भड़क और राशिद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। शहला राशिद के ट्वीट पर रि-ट्वीट करते हुए अशोक पंडित ने लिखा- “आंतकियों के साथ सोने और जेएनयू में भारत विरोधी नारे लगाने के बजाए संघी होना ज्यादा बेहतर है।” पंडित के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हो की गई। लेकिन इसी दौरान एक ट्विटर पर एक ट्वीट शेयर किया जाना लगा जिसमें सारिका पांडित यानि अशोक पंडित के बेटी की तरफ से लिखा गया था। कि उन्हें अपने पिता पर शर्म है और वो एक पिता होने के नाते एक दूसरी हिंदुस्तानी लड़की के आतंकियों के साथ सोने जैसे टिप्पणी कैसे कर सकते हैं। इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए अशोक पंडित ने लिखा कि जब मैंने उन्हें उनकी जुबान में जवाब दिया तो वो मेरी बेटी को प्रताड़ित कर रहे हैं। मेरे परिवार को गाली दे रहे हैं।

 

 

 

https://twitter.com/ashokepandit/status/839114580617986048

https://twitter.com/ashokepandit/status/839115006381805568

https://twitter.com/ashokepandit/status/839115173663223810

https://twitter.com/ashokepandit/status/839115372527816704