Elon Musk Starlink India Launch: एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट स्टारलिंक भारत में अपनी सर्विसेज लॉन्च करने के लिए तैयार है। अब देशभर में इंटरनेट यूजर्स और टेक दुनिया की निगाहें स्टारलिंक की भारत में एंट्री पर टिकी हुई हैं। SpaceX ने अभी तक अपने फाइनल प्लान को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। लेकिन पिछले कई महीनों से सैटेलाइट बेस्ड ब्रॉडबैंड के भारत में होने वाली कीमत, रेट और उपलब्धता की जानकारी सामने आ रही है।
लीक हुई थी स्टारलिंक प्लान्स की कीमत
2025 के आखिर में कई सारे यूजर्स ने स्टारलिंक इंडिया की वेबसाइट पर लिस्ट किए गए प्लान की कीमत देखी थी। इस लिस्टिंग से पता चला था कि स्टारलिंक रेजिडेंशियल प्लान की कीमत करीब 8,600 रुपये प्रति माह और वन-टाइम हार्डवेयर किट की कीमत 34,000 रुपये थी। साइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, इस प्लान में अनलिमिटेड डेटा, हाई अपटाइम और सिंपल इंस्टॉलेशन जैसे फीचर्स शामिल थे।
हालांकि, कुछ समय बाद ही स्टारलिंक ने यह स्पष्ट किया था कि ये कीमतें आधिकारिक नहीं हैं और यह एक टेक्निकल ग्लिच था। SpaceX के एक एग्जिक्युटिव ने स्पष्ट किया था कि साइट कभी भी ग्राहकों के लिए लाइव नहीं हुई और एक कॉन्फिगरेशन एरर के चलते ‘डमी टेस्ट डेटा’ दिख रहा था। कंपनी ने कीमत की भी पुष्टि नहीं की थी।
स्टारिलंक के प्लान की कीमत क्या हो सकती है?
बता दें कि स्टारिलंक ने अभी तक आधिकारिक कीमत का खुलासा नहीं किया है। लेकिन कई रिपोर्ट्स और रेगुलेटरी फाइलिंग से पता चला है कि स्टारलिंक देश में कई प्लान लॉन्च करने की तैयारी मं है। इससे पहले इंडस्ट्री में खबरें आई थीं कि स्टारिलंक के प्लान की कीमत भारत में 3000 रुपये हो सकती है। कंपनी उन एरिया में सर्विसेज ऑफर करेगी जहां ट्रेडिशनल ब्रॉडबैंड कवरेज उपलब्ध नहीं है।
अन्य इंडस्ट्री रिपोर्ट्स में संकेत मिले हैं कि भारत के बेहद प्रतिस्पर्धी बाजार में तेजी से यूजर्स को आकर्षित करने के लिए प्रमोशनल ऑफर्स के तहत शुरुआती कीमतें 850 रुपये प्रति माह से भी कम हो सकती हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की अभी तक SpaceX की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
स्पीड, कवरेज और अन्य बातें
स्टारलिंक का लो-अर्थ-ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क ट्रेडिशनल जियोस्टेशनरी सैटेलाइट इंटरनेट की तुलना में ज्यादा स्पीड देने का वादा करता है। इसके साथ ही इसकी लेटेंसी इतनी कम होती है कि स्ट्रीमिंग और वीडियो कॉल जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल आसानी से किए जा सकें। वैश्विक स्तर पर इसके आंकड़े दिखाते हैं कि स्पीड आमतौर पर व्यापक रेंज में रहती है लेकिन घरेलू इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद होती है।
भारत के लिए यह खासतौर पर दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में बड़ा बदलाव ला सकता है। जहां अब भी फाइबर नेटवर्क सीमित है और 4G/5G सिग्नल अक्सर बाधित रहते हैं। सैटेलाइट इंटरनेट जमीन पर मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं होता जिससे यह उन स्कूलों, कंपनियों और घरों के लिए जीवनरेखा साबित हो सकता है जो अब तक कनेक्टिविटी से वंचित रहे हैं।
रेगुलेटरी रोडमैप और उम्मीदें
स्टारलिंक भारत में कमर्शियल लॉन्च से पहले कई अहम रेगुलेटरी बाधाओं को पार कर चुका है। इनमें दूरसंचार विभाग (DoT) से लाइसेंस और ट्रायल स्पेक्ट्रम की मंजूरी शामिल है। हालांकि अभी तक आधिकारिक लॉन्च तारीख घोषित नहीं की गई है। लेकिन इंडस्ट्री जानकारों का मानना है कि सर्विस की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से होगी और इंफ्रास्ट्रक्चर व नियामकीय अनुपालन मजबूत होने के साथ इसकी उपलब्धता धीरे-धीरे बढ़ेगी।
एलन मस्क और भारतीय टेलीकॉम अधिकारियों ने भी जोर देकर कहा है कि स्टारलिंक की एंट्री कनेक्टिविटी सेक्टर में एक नया अध्याय शुरू कर सकती है। हालांकि कीमतों, प्लान्स और देशभर में रोलआउट से जुड़ी अंतिम जानकारी अभी सामने आना बाकी है।
