Madari Movie Review: इरफान की नौकरी बॉस्टन में लगती है। वो जाने की तैयारी कर रहे होते हैं। निकलने से कुछ दिन पहले एक आदमी उनके पास आकर कहता है कि पुल हादसे में उसने भी अपना बेटा खोया था। ये वही हादसा था जिमसे इरफान ने भी अपना बेटा खोया। वह इरफान पर कमेंट करते हुए कहता है, कम से कम मैंने अपने पैसे बचा लिए। निशिकांत कामत इस तरह की फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। कहानी सिस्टम की कमियों की एक झलक देती है। इसमें पॉलिटिक्स में घुल रही गंदगी और आम आदमी को बर्दाश्त के हद तक पहुंचाने की कहानी है। जब वो खड़ा होता है और कहता है कि अब बस। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह एक आदमी सब कुछ खो देने के बाद वो इससे बाहर निकलने के लिए क्या तरीका निकालता है।
फिल्म में इरफान एक पिड़ित पिता के किरदार में हैं जो अपने बेटे की मौत का बदला लेने के लिए टॉप पॉलिटीशियन के बेटे को किडनैप कर लेता है। जिमि शेरगिल एक पुलिस अफसर के किरदार में हैं, जो इरफान का पता लगाने के लिए जमीन आसमान एक कर देता है। पूरी फिल्म में इरफान और जिमी के बीच चल रहा चूहे बिल्ली का खेल मदारी को थ्रिलर बनाता है। फिल्म में इरफान सारी ताकतों पर घुटने पर ले आते हैं। वहीं इरफान की ताकत ये है कि वो एक आम आदमी हैं। बता दें कि फिल्म के प्रमोशन के दौरान इरफान ने लालू प्रसाद यादव, अरविंद केजरीवाल से मुलाकात भी की थी। उन्होंने पीएम मोदी से भी समय मांगा था। लेकिन पीएमओ से वक्त नहीं मिला था।

