Surya Grahan July 2019, Solar Eclipse July 2019 Date and Today Time in India Live Updates: 02 जुलाई यानि आज भारतीय समयानुसार रात 10 बजकर 25 मिनट पर सूर्य ग्रहण लग जायेगा। इस दौरान दुनिया के कुछ देशों में दिन में ही रात का नजारा देखने को मिलेगा। लगभग 4 घंटे तक लगने वाले इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव सुबह यानि 03 जुलाई को 03 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। भारत में रात होने की वजह से ये नजारा देखने को नहीं मिलेगा। लेकिन सेरेना, सैन जुआन, ब्रागाडो, जूनिन औररियो कुआर्टो, चिली और अर्जेंटीना के कुछ शहर हैं जहां से सूर्यग्रहण दिखाई देगा। चिली में सैंटियागो, ब्राजील में साओ पाउलो, अर्जेंटीना में ब्यूनस आयर्स, पेरू में लीमा, उरुग्वे में मोंटेवीडियो और पैराग्वे में असुनसियन कुछ लोकप्रिय शहर हैं, जहाँ सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। हालांकि इससे पहले 06 जनवरी को सूर्य ग्रहण लगा था लेकिन यह आशिंक सूर्य ग्रहण था। लेकिन 02 जुलाई को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। इस दौरान सूर्य चंद्रमा से पूरी तरह से ढक जायेगा। जिस वजह से कई स्थानों पर एक दम रात हो जायेगी।
Surya Grahan 2019 Today LIVE Updates: सूर्यग्रहण की क्या है विशेषता? पढ़ें

Highlights
बताया जाता है कि इस सूर्यग्रहण के बाद अब अगला सूर्यग्रहण 14 दिसंबर 2020 को लगेगा। खास बात यह है कि उस बार भी इस ग्रहण का असर चीली और अर्जेंटीना में ही दिखेगा।
इस महीने का दूसरा ग्रहण 16-17 जुलाई को खग्रास में चंद्रग्रहण होगा। (चंद्र) 17 जुलाई को लगेगा। चंद्र ग्रहण को भारत में आराम से देखा जा सकेगा। हालांकि, ग्रहण का सूतक एक दिन पहले ही 16 जुलाई (मंगलवार) को ही लग जाएगा। यह ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लग रहा है। चंद्र ग्रहण का समय 16 जुलाई की मध्यरात्रि 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होगा और करीब 3 घंटे रहेगा।
2019 का आखिरी ग्रहण और तीसरा सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर को होगा, जिसे भारत में देखा जा सकेगा। यह साल का दूसरा सूर्य ग्रहण है।
शास्त्रों में ऐसे तथ्य सामने आते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का संबंध भी सूर्य ग्रहण से रहा है। जिस दिन श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी डूबी, उस दिन सूर्य ग्रहण था। साथ ही जब यह नगरी कृष्ण के प्रपौत्र ने दोबारा बसाई थी, उस दिन भी सूर्य ग्रहण था।
ग्रह नक्षत्रों की दुनिया की यह घटना भारतीय महर्षियों को अत्यन्त प्राचीन काल से ज्ञात रही है। चिर प्राचीन काल में महर्षियों ने गणना कर दी थी। इस पर धार्मिक, वैदिक, वैचारिक, वैज्ञानिक विवेचन धार्मिक एवं ज्योतिषीय ग्रन्थों में होता चला आया है। महर्षि अत्रिमुनि ग्रहण के ज्ञान को देने वाले प्रथम आचार्य थे। ऋग्वेदीय प्रकाश काल अर्थात वैदिक काल से ग्रहण पर अध्ययन, मनन और परीक्षण होते चले आए हैं।
पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफी पास रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है और चन्द्रमा पूरी तरह से पृ्थ्वी को अपने छाया क्षेत्र में ले लेता है। इसके फलस्वरूप सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंच नहीं पाता है और पृथ्वी पर अंधकार जैसी स्थिति हो जाती है तब पृथ्वी पर पूरा सूर्य दिखाई नहीं देता। इस प्रकार बनने वाला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता है।
यह सूर्य ग्रहण तुला राशि वालों के लिए थोड़ा चिंताजनक हो सकता है। तुला राशि से नवम भाव में ग्रहण आपके पिता के स्वास्थ्य को बिगाड़ लेगा तथा चलते हुए कार्यों में रुकावट हो सकती है।
इस ग्रहण के दौरान एक वक्त ऐसा भी आएगा जब सूर्य Ring of Fire में बदल जाएगा। दुनियाभर के लोगों ने इस अनोखी खगोलीय घटना का देखने के लिए तमाम तरह की तैयारियां भी कर ली हैं।
2 जुलाई की रात से लगने वाले खग्रास सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले यानी दिन में 10.25 बजे से शुरू हो जाएगा। लेकिन भारत में ग्रहण नहीं होने के कारण सूतक का प्रभाव नहीं माना जाएगा। गौरतलब है कि ग्रहण के सूतक का प्रभाव उन्हीं स्थानों पर होता है, जहां ग्रहण के दौरान सूर्य या चंद्रमा की रोशनी पड़ती है।
बताया जाता है कि इस सूर्यग्रहण के बाद अब अगला सूर्यग्रहण 14 दिसंबर 2020 को लगेगा। खास बात यह है कि उस बार भी इस ग्रहण का असर चीली और अर्जेंटीना में ही दिखेगा।
मिथुन राशि-
मिथुन राशि में यह ग्रहण होने की वजह से स्वास्थ्य में काफी कमी आएगी,निर्णय लेने में भी कोई गलती हो सकती है।
ग्रहण के दौरान खुद को अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रखें। ग्रहण लगने से पहले ढेर सारा पानी पीने की सलाह दी जाती है।
मेष राशि से तीसरे भाव में यह ग्रहण लगेगा। जरुरी है कि इस राशि के लोग धोखे आदि से बचे, वाद-विवाद से बचें। इस राशि के लोग भगवान सूर्यनारायण की उपासना करें तथा सूर्य के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
इस महीने का दूसरा ग्रहण 16-17 जुलाई को खग्रास में चंद्रग्रहण होगा। (चंद्र) 17 जुलाई को लगेगा। चंद्र ग्रहण को भारत में आराम से देखा जा सकेगा। हालांकि, ग्रहण का सूतक एक दिन पहले ही 16 जुलाई (मंगलवार) को ही लग जाएगा। यह ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लग रहा है। चंद्र ग्रहण का समय 16 जुलाई की मध्यरात्रि 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होगा और करीब 3 घंटे रहेगा।
सूर्यग्रहण का नजारा देखने के लिए एक जगह पर सीधे खड़े हो जाएं और आंखों को ग्लास या सोलर व्यूवर से जरूर ढक लें। सूर्य से नजर हटाने के बाद सोलर फिल्टर /व्यूवर को जरूर हटाएं। सोलर फिल्टर वाले चश्मों को सोलर-व्युइंग ग्लासेस, पर्सनल सोलर फिल्टर्स या आइक्लिप्स ग्लासेस भी कहा जाता है।
यदि सूर्य या चंद्रमा के भाव में राहु-केतु में से कोई एक ग्रह स्थित होता है तब भी ग्रहण दोष का निर्माण होता है। ग्रहण दोष के प्रभाव से जीवन में पल-पल पर मुसीबतें आती रहती हैं। साथ ही नौकरी और व्यवसाय में कई प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा आर्थिक परेशानी और फिजूलखर्ची जैसी समस्या भी बनी रहती है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इंसान के जीवन के जीवन के सभी सुख और दुख उसके अपने कर्म के अलावा गोचर और नक्षत्र के प्रभाव पर निर्भर है। ग्रहों के गोचर में सभी नौ ग्रह विशेष महत्व रखते हैं। सूर्य ग्रह भी इनमें से एक है। ज्योतिष की किताब वृहद पाराशर होरा शास्त्र में लिखा है कि ग्रहण के समय जब सूर्य के साथ राहु या केतु में से कोई एक आता है तब ग्रहण दोष बनता है।
यह साल का दूसरा सूर्य ग्रहण है। इस महीने चंद्र ग्रहण भी पड़ने वाला है। जो कि साल का आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। 16 जुलाई को आंशिक चंद्र ग्रहण लगने वाला है।
अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा इस पूर्ण सूर्यग्रहण की लाइव स्ट्रीमिंग करेगी। इसके अलावा अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा इस ग्रहण की तस्वीरें भी जारी की जायेगी। कुल 161 मिनट, यानि 2 घंटे 41 मिनट तक यह सूर्य ग्रहण चलेगा।
यह खंडग्रास सूर्यग्रहण होगा, जो मूल नक्षत्र एवं धनु राशि पर मान्य होगा। यह खंडग्रास सूर्यग्रहण केवल दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में ही दिखाई देगा। ग्रहण का स्पर्शकाल प्रात: 8 बजकर 10 मिनट, मध्यकाल प्रात: 9 बजकर 31 मिनट एवं मोक्ष 10 बजकर 51 मिनट पर होगा। ग्रहण का पर्वकाल 2 घंटा 41 मिनट का रहेगा।
साल 2019 की शुरुआत सूर्य ग्रहण से हो हुई थी, जो 6 जनवरी को पड़ा था और 2 जुलाई को दूसरा सूर्य ग्रहण होने जा रहा है। खगोल शास्त्रियों के साथ-साथ ज्योतिष शास्त्रियों के लिए ग्रहण में काफी दिलचस्पी होती है। लेकिन इस बार जुलाई के महीने में दो ग्रहण- सूर्य और चंद्र ने इनकी दिलचस्पी बढ़ा दी है। दरअसल, 2 जुलाई के बाद 2 और ग्रहण होंगे, जिसमें एक खंडग्रास चंद्रग्रहण और एक खंडग्रास सूर्यग्रहण शामिल है।
सूतक के दौरान मंदिरों में भगवान के पट बंद कर दिए जाते हैं इसलिए उनकी पूजा-अर्चना नहीं करनी चाहिए। भगवान की मूर्ति को स्पर्श न करें। साथ ही तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
सूर्य ग्रहण से कुछ घंटों पहले सूतक शुरु हो जाता है। शास्त्रों में सूतक काल को खराब समय माना गया है। इस समय कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। इस समय किसी भी अनहोनी से बचने के लिए ईश्वर की अराधना करनी चाहिए।
आमतौर पर कहा जाता है कि ग्रहण को देखते हुए खास सावधानियां बरतनी चाहिए। चूंकि यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसीलिए आप इस दौरान खुली आंखों से आसमान देख सकते हैं।