Pitru Paksha 2019 Dates, Significance, Tarpan Vidhi, shraddha visarjan: श्राद्ध पक्ष 14 सितंबर से शुरु हो रहा है जो 28 सितंबर तक चलेगा। ब्रह्म पुराण के श्राद्ध प्रकाश में श्राद्ध पक्ष के महत्व का वर्णन मिलता है जिसमें कहा गया है कि जो उचित काल, पात्र एवं स्थान के अनुसार, शास्त्रोचित विधि से पितरों को लक्ष्य करके श्रद्धापूर्वक ब्राह्मणों को दिया जाता है, वह श्राद्ध है। हिंदू ग्रंथ ऋग्वेद में पितृगण तीन श्रेणियों के बताए गए हैं – निम्न, मध्यम और उच्च तो वहीं तीन तैतरीय ब्राह्मण में इस बात का उल्लेख है कि पितर लोग जिस लोक में निवास करते हैं, वह भू-लोक और अंतरिक्ष के बाद है।

पितरों के लिए हम जो कुछ भी श्रद्धापूर्वक अर्पण करते हैं, उसे अग्नि देवता उनके पास पहुंचा देते हैं, इसी कारण सूर्यास्त के बाद यह अनुष्ठान नहीं किया जाता। बौधायन धर्मसूत्र में के अनुसार जो व्यक्ति पितृ कर्म करता है, उसे लंबी आयु, स्वर्ग, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है। भारत में कई तीर्थ ऐसे हैं जहां श्राद्ध, पिण्डदान करने का कार्य किया जाता है, लेकिन उनमें गयाजी को सबसे उत्तम माना गया है। वशिष्ठ धर्मसूत्र में इस बात को स्पष्टता के साथ कहा गया है कि जैसे एक किसान अच्छी बारिश से प्रसन्न होता है, वैसे ही गया में पिण्डदान से पितर प्रसन्न होते हैं। नारद पुराण के उत्तर भाग में वर्णन है कि जो पितृ कर्म का अधिकार रखता हो, गया के दर्शन व वहां श्राद्ध करने से ब्रह्मलोक पा जाता है।’

पितृपक्ष श्राद्ध तिथि 2019 और तिथि के अनुसार श्राद्ध का पुण्य फल:

13 सितंबर शुक्रवार प्रोष्ठपदी/पूर्णिमा श्राद्ध
14 सितंबर शनिवार प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध – धन लाभ
15 सितंबर रविवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध – आरोग्य
17 सितंबर मंगलवार तृतीया तिथि का श्राद्ध – संतति प्राप्ति
18 सितंबर बुधवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध – शत्रु नाश
19 सितंबर बृहस्पतिवार पंचमी तिथि का श्राद्ध – लक्ष्मी प्राप्ति
20 सितंबर शुक्रवार षष्ठी तिथि का श्राद्ध – पूज्यता प्राप्ति
21 सितंबर शनिवार सप्तमी तिथि का श्राद्ध – गणों का आधिपत्य प्राप्ति
22 सितंबर रविवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध – उत्तम बुद्घि की प्राप्ति
23 सितंबर सोमवार नवमी तिथि का श्राद्ध – उत्तम स्त्री की प्राप्ति
24 सितंबर मंगलवार दशमी तिथि का श्राद्ध – कामना पूर्ति
25 सितंबर बुधवार एकादशी का श्राद्ध/द्वादशी तिथि/संन्यासियों का श्राद्ध – एकादशी तिथि वेद ज्ञान की प्राप्ति और द्वादशी तिथि श्राद्ध से सर्वत्र विजय
26 सितंबर बृहस्पतिवार त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध – दीर्घायु व ऐश्वर्य प्राप्ति
27 सितंबर शुक्रवार चतुर्दशी का श्राद्ध – अपघात से हुए मृतकों की तृप्ति
28 सितंबर शनिवार अमावस्या व सर्वपितृ श्राद्ध – कामना पूर्ति व स्वर्ग की प्राप्ति
29 सितंबर रविवार नाना/नानी का श्राद्ध