Navratri Ashtami And Navami Pujan Vidhi: नवरात्रि के दिनों में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि नवरात्रि के हर दिन किसी एक कन्या का तो पूजन करना ही चाहिए। लेकिन इन नौ दिनों में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसी के साथ व्रती इन दोनों दिनों में कन्याओं को भोग लगाकर अपने व्रत का पारण भी करते हैं। इस बार अष्टमी 6 अक्टूबर और नवमी 7 अक्टूबर को है।
अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का महत्व (Durga Ashtami, Kanchak Puja, Navratri 2019)
नवरात्रि पर्व नौ दिनों तक चलता है। नौ दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना करने के बाद ही नवरात्रि व्रत पूरा माना जाता है। नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप अष्टमी और नवमी के दिन पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं। और अपने भक्तों को जीवन में सुख और समृद्धि बने रहने का आशीर्वाद देती हैं।
कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त:
अष्टमी तिथि 05 अक्टूबर की सुबह 09 बजकर 52 मिनट से शुरू हो जायेगी और 6 अक्टूबर सुबह 10 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी जो 07 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। दोनों ही दिन कन्या पूजन करने का विधान है।
कन्या पूजन की विधि और नियम
– कन्याओं की उम्र 3 से 10 साल तक होनी चाहिए। कन्याओं की संख्या 9 होनी चाहिए और इनके साथ एक बालक को भी जरूर बिठाएं।
– कन्याओं के घर में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले उनके पैर धोने चाहिए।
– कन्याओं को साफ प्रवेश में ही बुलाना चाहिए क्योंकि उन्हें नौ देवियां मानकर पूजा जा रहा है। इसलिए घर की सफाई का विशेष ध्यान रखें।
– कन्याओं को रोली लगाकर उनके हाथ पर कलावा जरूर बांधना चाहिए।
– कन्याओं को घी का दीपक दिखाकर उनकी आरती उतारनी चाहिए।
– इसके बाद कन्याओं को भोग लगाएं। भोग में हलवा, पूरी और चना होना उत्तम माना गया है।
– अंत में कन्याओं को भेंट देकर और उनका पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए।

