Vidur Niti: विदुर महाभारत (Mahabharat) के मुख्य पात्रों में से एक हैं। इनका जन्म एक दासी के गर्भ से हुआ था जिस कारण इन्हें राजा बनने का अधिकार नहीं था। विदुर धर्म और नीतियों के ज्ञाता थे। इन्हें धर्मराज का अवतार भी माना जाता है। ये हस्तिनापुर के प्रधानमंत्री बने थे। विदुर समय के हिसाब से अपनी नीतियों के माध्यम से कौरवों के पिता धृतराष्ट्र को भी समझाते रहते थे। इनकी नीतियों को काफी कारगर माना जाता है। जानिए विदुर की कुछ प्रचलित नीतियां…
– विदुर के अनुसार चाहे समय अच्छा हो या बुरा हमें कभी दूसरों के उपकारों को नहीं भूलना चाहिए। कुछ लोग अपना अच्छा समय आने के बाद दूसरों की सहायता करना भूल जाते हैं ऐसे लोग अधिक लंबे समय तक सफल नहीं हो पाते। इंसान वहीं सफल है जो दूसरों की मदद को हमेशा याद रखे।
– जो व्यक्ति अपने जीवन में विवेक से फैसला नहीं लेता वह अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाता। इसलिए अपने जीवन में बिना सोचे समझे कोई भी निर्णय न लें।
– इंसान को उसके स्वभाव के आधार पर सम्मान मिलता है। सरल और सजग स्वभाव हर किसी को पसंद आता है।
– ज्ञान से हर समस्या का समाधान निकल सकता है। ज्ञानी व्यक्ति अपने ज्ञान के दम पर समाज में अपनी जगह बनाते हैं।
– विदुर नीति अनुसार काम, क्रोध और लोभ ये आत्मा का नाश करने वाले नरक के तीन दरवाजे हैं, अत: इन तीनों का नाश कर देना चाहिए।
– जो व्यक्ति सोच समझकर बोलता है उसे कभी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती। लेकिन जो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा बोलता है उसे समाज में कोई पसंद नहीं करता।
– दान करने के लिए अधिक धन की जरूरत नहीं होती। शास्त्रों में दान को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। दान करने के लिए जरूरत होती है बड़े दिल की।
– मीठी बोली हर किसी को आकर्षित करती है। जो लोग मधुर बोलते हैं उन्हें कभी कोई दिक्कत नहीं होती।
– विदुर नीति अनुसार अगल बिना किसी संघर्ष के कोई चीज मिलती है तो उसकी कीमत किसी को समझ नहीं आती। वहीं अगर कोई चीज कड़ी मेहनत के बाद प्राप्त होती है तो उसका एक अलग ही महत्व रहता है।
– किसी धनुर्धर वीर के द्वारा छोड़ा हुआ बाण संभव है किसी एक को भी मारे या न मारे। मगर बुद्धिमान द्वारा प्रयुक्त की हुई बुद्धि राजा के साथ-साथ सम्पूर्ण राष्ट्र का विनाश कर सकती है।

