Ganga Snan 2019 Date, Puja Vidhi, Muhurat, Samagri, Mantra, Timings: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान कर दीपदान करने का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन को महोत्सव की तरह मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा जी में स्नान करने से सात्त्विकता और पुण्यलाभ प्राप्त होता है। इसलिए इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा और दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता अनुसार गंगा में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है।
गंगा स्नान का महत्व: शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का बड़ा महत्व बताया गया है। इस दिन न केवल गंगा बल्कि अन्य पवित्र नदियों के साथ-साथ तीर्थों में भी स्नान करने की परंपरा है। यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरुक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन गंगा स्नान के बाद दान जरूर करना चाहिए। जिसमें संतरा, सेब, शरीफा, उड़द दाल, चावल और उजली चीजों का दान शुभ माना गया है। अगर आप इस पवित्र दिन में गंगा स्नान के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो घर में सुबह नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें। इस प्रक्रिया से भी उतना ही पुण्य मिलेगा, जितना गंगा स्नान से।
गंगा स्नान मुहूर्त: 12 नवंबर दिन मंगलवार को पूर्णिमा रात्रि 7.13 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 :12 बजे से 11 :55 बजे तक है। वहीं गुली काल मुहूर्त दोपहर 11 :33 बजे से 12 :55 बजे तक है। इस दिन पुरे दिन गंगा स्नान और विष्णु पूजन किया जा सकेगा।
गंगा स्नान की पूजा विधि और अन्य संबंधित सभी जानकारी जानने के लिए बने रहिए हमारे इस ब्लॉग पर…


कार्तिक पूर्णिमा पर महालक्ष्मी, केदार और वेशि योग का संयोग बन रहा है। चंद्रमा से मंगल के सप्तम भाव में रहने से महालक्ष्मी योग बनेगा। मान्यता है कि कुश लेकर इस तिथि पर गंगास्नान या स्नान करने से सात जन्म के पापों का नाश हो जाता है। चर्मरोग व कर्ज से मुक्ति मिलने के साथ वैवाहिक संबंधों में आनेवाली परेशानियां भी दूर होती हैं।
कार्तिक पूर्णिमा 2019 का पर्व आज 12 नवंबर को पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन गंगा, सरयू, नर्मदा और यमुना समेत देश की विभिन्न पवित्र नदियों में लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। इस दिन बहुत से लोग व्रत करते हैं और धार्मिक स्थलों, मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का मुहूर्त--
सुबह :6:59 से 9.16बजे
दोपहर 12 से2.38 बजे
मिथिला पंचाग के अनुसार 12 नवंबर यानी आज मंगलवार के दिन पूर्णिमा रात्रि 7.13 बजे तक है। जबकि बनारसी पंचांग में सुबह 07:02 बजे तक बताया गया है। इसमें अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 :12 बजे से 11 :55 बजे तक और गुली काल मुहूर्त दोपहर 11 :33 बजे से 12 :55 बजे तक बताया गया है। उदया तिथि मानने वालों के लिए आज पूरे दिन पूर्णिमा तिथि का मान रहेगा और पूरे दिन गंगा स्नान और विष्णु पूजन का शुभ काल रहेगा।
कासगंज जिले में रविवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर गंगा घाटों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ा। हर हर गंगे के जयकारों से घाट गूंजायमान हो गए। राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा सहित प्रदेश के दूर दराज इलाकों से आकर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने गरीबों, ब्राह्मणों को दान-पुण्य किया।
स्नान को भोजन से भी ऊंचा माना जाता है। पुलस्त्य ऋषि ने कहा भी है कि स्नान के बिना न तो शरीर निर्मल होता है और न ही बुद्धि। अंगिरा ऋषि के अनुसार, स्नान करते समय हाथ में कुशा जरूर होनी चाहिए। पवित्र नदी, समुद्र, सरोवर, कुआं और बावड़ी जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों में किया गया वरुण स्नान अति पावन माना गया है। मदन पारिजात के अनुसार- कार्तिक मास में जिते्द्रिरय रहकर नित्य स्नान करें और जौ, गेहूं, मूंग, दूध-दही और घी आदि का भोजन करें, तो सब पाप दूर हो जाते हैं। पुण्य प्राप्ति के लिए सूर्योदय से पूर्व ही स्नान करना चाहिए।
शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का बड़ा महत्व बताया गया है। इस दिन न केवल गंगा बल्कि अन्य पवित्र नदियों के साथ-साथ तीर्थों में भी स्नान करने की परंपरा है। यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरुक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन गंगा स्नान के बाद दान जरूर करना चाहिए। जिसमें संतरा, सेब, शरीफा, उड़द दाल, चावल और उजली चीजों का दान शुभ माना गया है। अगर आप इस पवित्र दिन में गंगा स्नान के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो घर में सुबह नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें। इस प्रक्रिया से भी उतना ही पुण्य मिलेगा, जितना गंगा स्नान से।
क्या करें दान
अरवा चावल, जौ,तिल,मौसमी फल, लौकी में छिपाकर सिक्का दान
विष्णु को चढ़ाएं गुलाब,मन की मुराद पूरी होगी
कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान विष्णु को तुलसी माला और गुलाब का फूल चढ़ाने से मन की सारी मुरादें पूरी होंगी। वहीं महादेव को धतूरे का फल और भांग चढ़ाने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलेगी।
प्राचीन काल में, त्रिपुरा नामक एक राक्षस था। उन्होंने एक लाख वर्षों तक प्रयागराज में बहुत कठिन तपस्या (घोर तपस्या) की। उनकी भक्ति को देखकर, सभी जीवित प्राणी और देवता (देवता) डर गए। इसलिए, देवता ने अपनी तपस्या को तोड़ने के लिए अप्सरा (अप्सरा) को भेजा, लेकिन यह बेकार थी। त्रिपुरासुर के तप (तपस्या) से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा उसके सामने प्रकट हुए और उसे इच्छा करने को कहा। त्रिपुरासुर ने कामना की, मुझे न तो किसी देवता की हत्या करनी चाहिए और न ही किसी इंसान की। ब्रह्मा जी ने उन्हें इच्छा प्रदान की, जिसके बाद, दानव निडर हो गया और सभी को सताना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, बल्कि वह इसे जीतने के लिए कैलाश भी गया। वहाँ उसका भगवान शिव से युद्ध हुआ और अंत में, भगवान ने उसे ब्रह्मा और भगवान विष्णु की मदद से मार दिया।
गंगा तट पर जब भी जाएं श्रद्धा एवं विश्वास के साथ जाएं और वहां पर कोई ऐसा आचरण न करें जो धर्म विरुद्ध है। गंगा स्नान करते समय सिर्फ अपने पाप ही नहीं बल्कि बल्कि मन का मैल भी दूर करें। गंगा तट को साफ-सुथरा रखने में सहयोग करें। गंगा किनारे पालिथीन पर प्रतिबंध है। ऐसे में इसका प्रयोग न करें और न ही गंदगी फैलाएं। पवित्र नदियों में किसी भी प्रकार का कूड़ा-कचरा न डालें।
तन और मन को पवित्र करने वाली मां गंगा नदी में स्नान का तो विशेष फल मिलता ही है, महज दर्शन से ही साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसीलिए पुण्यसलिला मां गंगा को लेकर कहा भी गया है —
गंगे तव दर्शनात् मुक्ति।
गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा की कृपा और पापों से मुक्ति पाने के लिए इस विशेष मंत्र का पाठ अवश्य करें। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इस मंत्र का जाप पापों से मुक्त करता हुआ जीवन को मंगलमय बनाता है।
“गंगागंगेति योब्रूयाद् योजनानां शतैरपि ।
मुच्यते सर्व पापेभ्यो विष्णुलोकं सगच्छति। तीर्थराजाय नमः”
अपनी सुख-समृद्धि की कामना लिए जब आप मां गंगा के पावन जल में डुबकी लगाने पहुंचे तो अपनी चप्पलें तट से दूर रखें क्योंकि इसी गंगा तट पर लोग बड़ी संख्या में पूजन करते हैं। लाखों-करोड़ों लोगों के जीवन का आधार मानी जाने वाली मां गंगा के जल में किस भी प्रकार का कूड़ा न डालें। पूजा का बचा हुआ भी नहीं। अमृत जल प्रदान करने वाली मां गंगा के जल की शुद्धता बनाए रखने के लिए गंगा में स्नान करते समय साबुन का प्रयोग न करें और न ही कपड़े धोएं। धार्मिक पर्व और परंपरा को ध्यान में रखते हुए मर्यादित वस्त्र पहनें।
कार्तिक महीने की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। सनातन धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को आता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा कल यानी 12 नवंबर को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन नदियों में स्नान, दीपदान, भगवान की पूजा और दान का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन कुछ खास नियमों का पालन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर क्या हैं वो खास नियम और शुभ मुहूर्त ।
-कार्तिक मास में सारे देवता जलाशयों में छिपे होते हैं
-भगवान श्रीहरि भी पाताल में निवास करते हैं
-इस तिथि पर गंगा स्नान से एक हजार अश्वमेघ यज्ञ और सौ वाजस्नेय यज्ञ के समान फल
-सालभर के गंगास्नान और पूर्णिमा स्नान का फल मिलता है
गंगा जी में स्नान करते समय हमेशा नदी की धारा या सूर्य की ओर मुंह करके नहाएं। अक्सर इस बात को लेकर शंका होती है कि आखिर गंगा स्नान करते समय कितनी संख्या में डुबकी लगाना शुभ होता है। गंगा ही नहीं किसी भी नदी में स्नान करते समय हमेशा 3, 5, 7 या 12 डुबकियां लगाना अच्छा बताया गया है। यदि आप तीन डुबकी लगा रहे हैं तो आप एक डुबकी देवी-देवताओं के नाम से, एक अपने पुरखों के नाम से और एक अपने परिवार के नाम से लगाएं।
- प्रातः काल स्नान के पूर्व संकल्प लें
- फिर नियम और तरीके से स्नान करें
- स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य दें
- साफ वस्त्र या सफेद वस्त्र धारण करें और फिर मंत्र जाप करें
- मंत्र जाप के पश्चात अपनी आवश्यकतानुसार दान करें
- चाहें तो इस दिन जल और फल ग्रहण करके उपवास रख सकते हैं
शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का बड़ा महत्व बताया गया है। इस दिन न केवल गंगा बल्कि अन्य पवित्र नदियों के साथ-साथ तीर्थों में भी स्नान करने की परंपरा है। यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरुक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन गंगा स्नान के बाद दान जरूर करना चाहिए। जिसमें संतरा, सेब, शरीफा, उड़द दाल, चावल और उजली चीजों का दान शुभ माना गया है। अगर आप इस पवित्र दिन में गंगा स्नान के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो घर में सुबह नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें। इस प्रक्रिया से भी उतना ही पुण्य मिलेगा, जितना गंगा स्नान से।
12 नवंबर दिन मंगलवार को पूर्णिमा रात्रि 7.13 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 :12 बजे से 11 :55 बजे तक है। वहीं गुली काल मुहूर्त दोपहर 11 :33 बजे से 12 :55 बजे तक है। इस दिन पुरे दिन गंगा स्नान और विष्णु पूजन किया जा सकेगा।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था, इसलिए इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यदि कृतिका नक्षत्र इस दिन पड़ता है, तो इसे महाकार्तिकी कहा जाता है। यदि यह भरणी नक्षत्र है, तो व्यक्ति को शुभ परिणाम मिलते हैं। और अगर इस दिन रोहिणी नक्षत्र हो, तो कार्तिक पूर्णिमा का महत्व दस गुना बढ़ जाता है।