Navratri day 9, Durga Navami (Maha Navami) 2019 Date, Puja Vidhi, Timings: नवरात्रि के नौवें दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। देवी के इस स्वरूप की उपासना से सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। देवीपुराण के अनुसार इनकी कृपा से भगवान शिव को भी तमाम सिद्धियां हासिल हुई थी। मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं और शेर इनकी सवारी है। नवदुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अंतिम है। जानिए नवरात्रि (Navratri Day 9) के नवें और आखिरी दिन का क्या महत्व और इतिहास है…

Happy Durga Navami 2019: Maha Navami Wishes Images, Wallpaper, Photos, Status, Quotes, Messages and Pics

महानवमी का महत्व: (Maha Navami Puja Importance)

नवरात्रि के 9वें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इसके अगले दिन विजया दशमी पर्व मनाया जाता है। नवमी के दिन लोग नौ कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोग लगाते हैं। और इसी दिन नवरात्रि पर्व का समापन हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षक का वध किया था। भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण और धर्मराज युधिष्ठिर के संवाद में दुर्गाष्टमी और महानवमी के पूजन का उल्लेख मिलता है। इससे पता चलता है कि महानवमी के दिन युगों-युगों से मां दुर्गा की अराधना होती आ रही है। ऐसी मान्यता है कि मां भगवती ने 9वें दिन देवताओं और भक्तों के सभी वांछित मनोरथों को सिद्ध कर दिया जिससे वे मां सिद्धिदात्री के रूप में संपूर्ण विश्व में व्याप्त हुईं। इनकी पूजा से भक्तों के सभी कार्य सिद्ध होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Happy Durga Navami Wishes Images, Photos, Wallpapers, Messages: इन मैसेज के जरिए आप अपनों को करें विश

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Highlights

    10:40 (IST)07 Oct 2019
    महा नवमी पर उत्तम स्वास्थ्य और आरोग्य की प्राप्ति के लिए मंत्र

    ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते॥

    10:30 (IST)07 Oct 2019
    सभी प्रकार की विघ्न-बाधाओं से मुक्ति पाने और धन-धान्य की प्राप्ति के लिए मंत्र

    सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्दैरिविनाशनम्।।सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः। मनुष्यो मत् प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।

    09:54 (IST)07 Oct 2019
    जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए इस तरह करें मां सिद्धिदात्री की पूजा

    पूजा के नियम पहले की ही भांति रहेंगे। जिसमें पूरी पवित्रता का ध्यान रखते हुए संयम व ब्रह्मचर्य का भी पालन का महत्व है। पूजन की सामाग्री पूर्व की तरह ही रहेगी। सुगन्धित पुष्प नैवेद्य में खीर व हलुवे का प्रसाद और श्रीफल चढ़ाने का विशेष विधान है। साथ ही विधि-विधान से पूजा करने के बाद हवन भी किया जाता है। इसके बाद प्रत्येक देवी के निमित्त एक कन्या,  इस प्रकार नौ कन्याओं का और एक बालक का पूजन करें, उन्हें भोजन खिलाएं और जो बन सके दक्षिणा करें। इस प्रकार करके श्रद्धा सहित पूजन को सम्पन्न करें। जिससे वांछित फल प्राप्त होते हैं। मां की कृपा से इस संसार में भक्तों को जीवन मे सुख-शांति प्राप्ति होती है।

    09:11 (IST)07 Oct 2019
    महा नवमी पर मनोकामना पूर्ति के लिए इस मंत्र से करें मां सिद्धिदात्री की पूजा

    मां सिद्धिदात्री के अनेक मंत्र हैं, जिसमें कुछ प्रमुख मंत्र है, जिससे भक्तों को वांछित परिणाम प्राप्त होते हैं। साथ ही मां की परम कृपा से भक्तों को मोक्ष प्राप्ति का वरदान मिलता है। कुछ उपयोगी मंत्र इस प्रकार हैं –सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी।  त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः ।।

    07:58 (IST)07 Oct 2019
    इस उम्र की कन्याओं का पूजन माना गया है श्रेष्ठ

    नवरात्रि के नौवें दिन कन्या पूजन का विधान है। जो भक्त नवरात्रि के दौरान व्रत रखते हैं वे इस दिन कन्या पूजन के साथ व्रत-पूजन सम्पन्न करते हैं। कन्या पूजन के लिए शास्त्रों में (देवी भागवत पुराण) खास उम्र की कन्याओं का वर्णन किया गया है। कन्या पूजन के लिए 2 वर्ष से बड़ी और 10 वर्ष से छोटी आयु की कन्याओं को निमंत्रित करना चाहिए।

    मान्यता है कि दो साल की कन्या कुमारी, तीन साल की त्रिमूर्ति, चार साल की कल्याणी, पांच साल की रोहिणी, छ: साल की कालिका, सात साल की चंडिका, आठ साल की शाम्भवी, नौ साल की दुर्गा की स्वरूप होती हैं। भक्तों को कन्या पूजन के वक्त इन कन्याओं का नाम याद रखना चाहिए।

    07:18 (IST)07 Oct 2019
    नवरात्रि के नौवें दिन किया जाता है हवन, जानिए हवन सामग्री

    आम की लकड़ी, तना और पत्ता, पीपल का तना और छाल, बेल, नीम, पलाश, गूलर की छाल, चंदन की लकड़ी, अश्वगंधा, ब्राह्मी, मुलैठी की जड़, कर्पूर, तिल, चावल, लौंग, गाय का घी, गुग्गल, लोभान, इलायची, शक्कर और जौ। साथ ही साथ एक सूखा नारियल या गोला, कलावा या लाल रंग का कपड़ा और एक हवन कुंड।

    05:18 (IST)07 Oct 2019
    अब इन मंत्रों का उच्चारण करते हुए हवन प्रारंभ करें:

    ओम आग्नेय नम: स्वाहा, ओम गणेशाय नम: स्वाहा, ओम गौरियाय नम: स्वाहा, ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा, ओम दुर्गाय नम: स्वाहा, ओम महाकालिकाय नम: स्वाहा, ओम हनुमते नम: स्वाहा, ओम भैरवाय नम: स्वाहा, ओम कुल देवताय नम: स्वाहा,ओम स्थान देवताय नम: स्वाहा, ओम ब्रह्माय नम: ओम ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु स्वाहा, स्वाहा, ओम विष्णुवे नम: स्वाहा, ओम शिवाय नम: स्वाहा, ओम जयंती मंगलाकाली, भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमस्तुति स्वाहा, ओम गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा, ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते।

    05:18 (IST)07 Oct 2019
    इन हवन सामग्री को जुटा लें:

    आम की सूखी लकड़ी, घी, अक्षत, तिल जौ, हवन सामग्री बना बनाया लाना चाहें तो वो भी कर सकते हैं। उसमे तमाम औषधियों के तने, पत्ते, छाल का मिश्रण होता है। इसके अलावा एक सूखा नारियल या गोला, कलावा या लाल रंग का कपड़ा और एक हवन कुंड।

    05:18 (IST)07 Oct 2019
    दुर्गा नवमी पर हवन के साथ संपन्न करें व्रत

    नवरात्रि में नौ दिनों का उपवास और पूजा अर्चना के बाद अंतिम दिन हवन किया जाता है। इसके तहत उन सभी देवी देवताओं का आवाह्नन करने का उद्देश्य रहता है जिनके कारण आपका जीवन सीधे प्रभावित होता है। इसके अलावा वैज्ञानिक कारणों से भी हवन को हमेशा से अच्छा कहा गया है। तो आइए जानते हैं कैसे दुर्गा नवमी पर हवन के साथ व्रत संपन्न करें...

    21:07 (IST)06 Oct 2019
    Maa sidhidatri Katha in Hindi: मां सिद्धिदात्री से ही भगवान शंकर ने हासिल की थी सिद्धि

    मार्कण्डेय पुराण मां सिद्धिदात्री के बारे में विस्तार से वर्णन है कि संसार में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व कुल आठ सिद्धियां हैं। देवी मां दुर्गा के नवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री के पास ही भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां देने का समर्थ्य है। देवी पुराण में कहा गया है कि भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को हासिल किया था। भगवान शिव का आधा शरीर देवी स्वरूप में परिवर्तित हुआ था और वह संसार में अर्धनारीश्वर के रूप में प्रसिद्ध हुए थे।

    21:01 (IST)06 Oct 2019
    मां सिद्धिदात्री की आरती का जरूर करें पाठ:

    जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता ।
    तू भक्तो की रक्षक, तू दासों की माता ॥
    तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि ।
    तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि ॥
    कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम ।
    जभी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम॥
    तेरी पूजा में तो न कोई विधि है ।
    तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है ॥
    रविवार को तेरा सुमरिन करे जो ।
    तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो ॥
    तू सब काज उसके कराती हो पूरे ।
    कभी काम उस के रहे न अधूरे ॥
    तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया ।
    रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया ॥
    सर्व सिद्धि दाती वो है भागयशाली ।
    जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली ॥
    हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा ।
    महा नंदा मंदिर मैं है वास तेरा ॥
    मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता ।
    वंदना है सवाली तू जिसकी दाता ॥

    20:06 (IST)06 Oct 2019
    महानवमी तिथि और मुहूर्त:

    नवमी तिथि प्रारंभ - 06 अक्टूबर सुबह 10:54 AM से
    नवमी तिथि समाप्त - 07 अक्टूबर सुबह 12:38 PM तक
    नवमी तिथि हवन मुहूर्त - 07 अक्टूबर को प्रात: 06:22 से 12:37 तक

    20:06 (IST)06 Oct 2019
    सिद्धि और ज्ञान दायी है मां सिद्धिदात्री

    पौराणिक मान्‍यता है कि मां दुर्गा के नवें स्‍वरूप मां सिद्धिदात्री का संबंध ज्ञान अर्जन करने वालों के लिए खास तौर पर है। इसलिए इस दिन इनकी आराधना की जाती है। सिद्धिदात्री की पूजा से सभी प्रकार के ज्ञान, सिद्धि आसानी से प्राप्त हो जाते हैं। कभी कोई कष्ट नहीं होता है। इसके अलावा नवमी (Navami) के दिन कन्‍या पूजन (Kanya Pujan) को भी विशेष महत्व दिया गया है।

    14:50 (IST)06 Oct 2019
    Maha Navami 2019 का शुभ मुहूर्त: जानिए कब कराएं कन्या पूजन

    नवरात्रि 2019 में इस साल नवमी तिथि महा-अष्टमी के दिन से ही लग रही है। 6 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 54 मिनट पर नवमी के शुरू होने की तिथि है। वहीं 7 अक्टूबर को दोपहर 12.38 बजे पर नवमी तिथि समाप्त हो जाएगी।

    10:29 (IST)06 Oct 2019
    ऐसे मनाई जाती है महानवमी:

    शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि 7 अक्टूबर के दिन पड़ रही है। इस दिन कन्याओं को भोग लगाया जाता है। इस दिन मां की विशेष पूजा करके उन्हें दोबारा से पधारने का आवाहन कर उनकी विदाई की जाती है। नवमी के दिन घर या मंदिर पर 3 से 9 साल तक की कन्याओं और एक लांगुरिया यानी छोटे लड़के का पूजन किया जाता है। उन्हें खीर, पूरी, हलवा और चने का भोग लगाया जाता है। उन्हें गिफ्ट या दक्षिणा देकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

    10:26 (IST)06 Oct 2019
    नवरात्रि के 9वें दिन इस मंत्र का करें जाप: 

    सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि।

    सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

    या देवी सर्वभू‍तेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।