Maha Navami 2019, Durga Navami (Mahanavami 2019) 2019 Date in India: शारदीय नवरात्रि (Navratri 2019) की महानवमी (Mahanavami) 7 अक्टूबर को पड़ रही है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री (Siddhidatri) स्वरूप की पूजा होती है। माता के इस रूप को सभी सिद्धियों को पूर्ण करने वाला माना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि खुद भगवान शिव ने इनकी उपासना कर परम सिद्धि प्राप्त की थी। यह दिन नवरात्रि पर्व का आखिरी दिन होता है। लोग इस दिन कन्याओं को भोजन कराकर अपना व्रत खोलते हैं। जानिए नवमी तिथि का महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त…

महा नवमी की तिथि और मुहूर्त: (Mahanavami 2019, Navratri 9th day, Maa Siddhidatri)

उत्तर भारत में महा नवमी दिन सोमवार, 7 अक्टूबर को मनाई जायेगी।
नवमी तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 06, 2019 को 10:54 ए एम बजे
नवमी तिथि समाप्त – अक्टूबर 07, 2019 को 12:38 पी एम बजे
अमृत काल मुहूर्त- सुबह 10 बजकर 24 मिनट से 12 बजकर 10 मिनट तक (7 अक्टूबर 2019)
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक (7 अक्टूबर 2019)

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप (maa siddhidatri): मां सिद्धिदात्री का वाहन सिंह हैं। ये कमल के पुष्प पर भी विराजमान है। इनकी कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। जिससे भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर कहलाए। इनके दायें तरफ नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का फूल है। मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति होती है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व (maa siddhidatri Puja Importance): नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। इनकी कृपा से सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति होती है। देवी सिद्धिदात्री की उपासना से अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व जैसी सभी आठों प्रकार की सिद्धियां साधक को प्राप्त होती हैं।

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि (maa siddhidatri Puja Vidhi): नवरात्रि के आखिरी दिन मां के इस रूप की पूजा कर उनकी विदाई कर दी जाती है। इस दिन पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ हो जाएं। इसके बाद मां के इस रूप की प्रतिमा की पूजा करें उन्हें फल, फूल, माला आदि चीजें अर्पित करें। अंत में मां की कथा सुन उनकी आरती उतारें। इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है। घर में छोटी-छोटी कन्याओं को बुलाकर उनका पूजन करें, उन्हें भोजन कराकर दक्षिणा दें और अंत में उनका पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

कन्या पूजन और हवन का सही समय (Kanya Pujan & Hawan Muhurt): इस साल नवरात्रि में नवमी तिथि महा-अष्टमी के दिन से ही लग चुकी है। 6 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 54 मिनट पर नवमी के शुरू होने की तिथि है। जबकि 7 अक्टूबर को दोपहर 12.38 बजे पर नवमी तिथि समाप्त हो जाएगी। यानी आपको दोपहर 12.30 मिनट से पहले कन्या पूजन और हवन का कार्य संपन्न कर लेना चाहिए।