Chhath Puja Sandhya Arghya 2019 : छठ पूजा आस्था और नियम-निष्ठा के साथ किया जाता है। मान्यता है जो व्रती महिलाएं संतान की कामना से इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक रखतीं हैं उन्हें संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है। इस बार छठ का महापर्व 31 अक्टूबर नहाय खाय के साथ शुरू हो गया है। 1 नवंबर को खरना पूजन के बाद 02 नवंबर (शनिवार) को अस्ताचलगामी (डूबते हुए) सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 03 नवंबर (रविवार) को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न किया जायेगा।

छठ पूजा के गीत देखें यहां 

छठ पूजा की विधि, आरती, मुहूर्त यहां 

लोक आस्था का महापर्व छठ पर संध्याकालीन अर्घ्य 02 नवंबर को दिया जाएगा। संध्याकालीन अर्घ्य में मुख्य तौर पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। जिसमें सूर्यास्त का समय बेहद खास माना जाता है। पंचांग के मुताबिक 02 नवंबर को सूर्यास्त का समय शाम 05 बजकर 35 मिनट है। इसलिए इस समय पर सूर्य को अर्घ्य देना शुभ होगा। साथ ही संध्याकालीन अर्घ्य के लिए भी यह समय सबसे शुभ माना जा रहा है।

छठ पूजा शुभ मुहूर्त (Chhath Puja Muhurat/Chhath Puja Arghya Time) :

छठ की तिथि- 2 नवंबर, दिन शनिवार

छठ के दिन सूर्योदय- 06:33 बजे

छठ के दिन सूर्यास्त- शाम 05:36 बजे

षष्ठी तिथि की शुरुआत- 00:51 बजे (02 नवंबर 2019)

षष्ठी तिथि का समापन 01:31 बजे (03 नवंबर 2019)

क्यों देते हैं डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य

आमतौर पर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा बहुत सारे व्रत और त्योहार में है। परंतु डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा खासतौर पर छठ पर्व में है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शाम के समय सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में संपन्नता का आगमन होता है। मान्यता है कि शाम के समय सूर्य से शाम के समय अपनी पत्नी प्रत्युषा के साथ होते हैं। ऐसे में उन्हें अर्घ्य देने से जल्द ही मनोकामना पूरी होती है। धार्मिक ग्रन्थों में ऐसा वर्णन मिलता है कि जो डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं, उन्हें उगते हुए सूर्य को भी अर्घ्य देना चाहिए।