चाणक्य को राजनीति का विद्वान माना जाता है। इन्होंने मौर्य वंश की स्थापना में अपना अहम योगदान दिया था। कहते हैं कि चाणक्य की नीतियां ऐसी होती थीं कि दुश्मन भी भांप नहीं पाते थे। इसलिए चाणक्य की नीतियां इतना अधिक प्रासंगिक है कि आज भी लोग फॉलो करते हैं। आज हर कोई शिक्षा और ज्ञान की मामले में सजग रहता है। आगे कुछ ऐसे चाणक्य नीति के बारे में बता रहे हैं जो कि हर किसी के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
ज्ञान के लिए आराम का त्याग: आचार्य चाणक्य अपनी चाणक्य नीति में कहते हैं कि इंसान यदि ज्ञान की चाह रखता है तो उसे सबसे पहले आराम को छोड़ना होगा। कुछ नया सीखने की प्रक्रिया में कष्ट झेलना पड़ता है। जो इंसान कष्टों को झेलकर भी ज्ञान की तालश में लगा रहता है उसका भविष्य स्वर्णिम होता है।
अपनी योजना को किसी के सामने प्रकट न करना: चाणक्य कहते हैं कि हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा है। इंसान को अपनी योजना को तब तक गुप्त रखना चाहिए जब तक कि वह सार्थक न कर ले। क्योंकि लोग दूसरों की योजना को जानकर उसे प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।
भाषा पर नियंत्रण: किसी भी इंसान को कार्यस्थल पर नकारात्मक वातावरण पसंद नहीं होता है। कई बार ऐसा होता है जो न चाहते हुए भी मुंह से निकल जाता है। फिर बाद में उसका पश्चाताप होता है। ऐसे में चाणक्य कहते हैं कि जो लोग अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं, उन्हें आखिरकार नष्ट ही होना पड़ता है।
चुनौतियों के लिए तैयार रहना: चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान पाने के लिए चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना चाहिए। जो लोग चुनौतियों का सामना करने के लिए योजना बनाते हैं और उसके लिए तैयार रखते हैं, उन्हें सफल होने की संभावना अधिक होती है।
सीखने के लिए बेशर्म होना: हर इंसान पेशेवर मसले पर कुछ न कुछ गलतियां करता है। इसके कारण कई बार आत्म सम्मान को ठेस पहुंचता है। ऐसे में कई बार लोग सावधानी से चलते हैं या जोखिम उठाने से बचते हैं। चाणक्य सलाह देते हैं कि इंसान को सीखने के मामले में बेशर्म होना चाहिए।
