Gau Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi: सनातन धर्म में गौ माता को माता का दर्जा दिया गया है और उन्हें सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और पुण्य का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार गौ माता की पूजा और आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से सुबह-शाम गौ माता की आरती करने से मन को शांति मिलती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। यहां हम आपके लिए ‘ॐ जय गौ माता, मैया जय धेनु माता’ की पूरी आरती लेकर आए हैं, जिसे आप श्रद्धा और भक्ति भाव से पढ़ सकते हैं। ऐसे में यहां पढ़िए गौ माता की पूरी आरती, ॐ जय गौ माता,मैया जय धेनु माता। मुकुन्द विधाता उमापति,सीतापति ध्याता।। ॐ जय धेनु माता की लिरिक्स इन हिंदी, साथ ही जानें गौ माता की आरती का महत्व, लाभ, अर्थ, आरती करने का सही समय और अन्य जानकारी…

  • गौ माता की आरती लिरिक्स इन हिंदी
  • गौ माता की आरती का महत्व
  • गौ माता की आरती करने के लाभ
  • गौ माता की आरती कैसे करें
  • गौ माता की आरती का सही समय?
  • गौ माता की आरती के बाद क्या करना चाहिए?
  • गौ माता की आरती अर्थ सहित

गौ माता की आरती लिरिक्स इन हिंदी (Gau Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi)

ॐ जय गौ माता,मैया जय धेनु माता।
मुकुन्द विधाता उमापति,सीतापति ध्याता।।
ॐ जय धेनु माता……..

सागर मंथन उपजी,कामधेनु माता ।
नमन किए सब देवता,अति पावन नाता।।

तनुजा जो तुझसे जन्मी,नंदिनी नाम रचे।
ऋषि वशिष्ठ की शक्ति, राजा दिलीप भजे ।।

पाप विनाशिनी मैया,सुखद भंडार भरे।
तैंतीस कोटि दैवत,अंग निवास करे।।

पंचगव्य है पावन,औषध गुणकारी।
रोग दोष मिटाए,मॉ तुम उपकारी ।।

जिस घर अंगना धेनु,मॉं की हो सेवा।
वैतरणी तरते वो नर,पाते शुभ मेवा।।

शुभ मति शुभ फल दायक,है संकट त्राता ।
जो जन करते सेवा,मोक्ष सुफल पाता ।।

आरती वंदना धेनु की,जो नर हैं गाते।
कहते हैं श्रीकृष्णा,वे मनु तर जाते।।

गौ माता की आरती का महत्व

सनातन धर्म में गौ माता को माता का स्थान दिया गया है और उन्हें साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार गौ माता में सभी देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए उनकी पूजा और आरती करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। गौ माता की आरती न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि यह मन, शरीर और वातावरण को भी शुद्ध करती है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि गौ माता की आरती करने से व्यक्ति को रोग, भय और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

गौ माता की आरती करने के लाभ

सनातन धर्म में गौ माता की पूजा और आरती को अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौ माता में सभी देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए उनकी आरती करने से अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। मान्यता है कि प्रतिदिन गौ माता की आरती करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इससे नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम व सद्भाव बढ़ता है।

गौ माता की आरती कैसे करें

सनातन धर्म में गौ माता की आरती को अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना गया है। श्रद्धा और सही विधि से की गई आरती से गौ माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आरती करने से पहले स्थान को साफ करें। यदि गौशाला में हैं तो वहां स्वच्छ स्थान चुनें, घर में हों तो गौ माता की तस्वीर या मूर्ति के सामने आरती करें। आरती से पहले स्नान कर लें या कम से कम हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें। मन और शरीर दोनों का शुद्ध होना आवश्यक है। आरती के लिए घी का दीपक, धूप, अगरबत्ती, फूल, अक्षत (चावल), जल और नैवेद्य (गुड़, चारा या फल) रखें। गाय को हरा चारा या गुड़ खिलाना बहुत पुण्यदायक माना जाता है। सबसे पहले गौ माता का ध्यान करें और उन्हें पुष्प अर्पित करें। इसके बाद दीपक जलाकर धूप-अगरबत्ती दिखाएं। अब श्रद्धा भाव से “ॐ जय गौ माता, मैया जय धेनु माता…” आरती का पाठ करें। आरती करते समय मन को एकाग्र रखें और किसी भी प्रकार का जल्दबाजी न करें। आरती समाप्त होने के बाद गौ माता से परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करें। अंत में सभी को आरती दें।

गौ माता की आरती का सही समय?

गौ माता की आरती सुबह सूर्योदय के बाद या शाम को सूर्यास्त के समय करना सबसे शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो प्रतिदिन एक निश्चित समय पर आरती करें।

गौ माता की आरती के बाद क्या करना चाहिए?

आरती के बाद गौ माता को हरा चारा, गुड़, चना, रोटी या फल श्रद्धा भाव से खिलाएं। इसे गौ सेवा का सबसे सरल और पुण्यदायक रूप माना जाता है। यदि संभव हो तो गौ माता की 3 या 7 बार परिक्रमा (प्रदक्षिणा) करें। मान्यता है कि इससे सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

गौ माता की आरती अर्थ सहित

ॐ जय गौ माता,मैया जय धेनु माता।
मुकुन्द विधाता उमापति,सीतापति ध्याता।।
ॐ जय धेनु माता……..

इस श्लोक का अर्थ है – हे गौ माता और धेनु माता! आप सभी देवताओं की कृपा और शक्ति से पूजनीय हैं, आपकी जय हो।”

सागर मंथन उपजी,कामधेनु माता ।
नमन किए सब देवता,अति पावन नाता।।

इस श्लोक का अर्थ है – सागर मंथन से कामधेनु माता प्रकट हुईं। सभी देवताओं ने उन्हें नमन किया, क्योंकि उनका संबंध अत्यंत पवित्र और पुण्यकारी है।

तनुजा जो तुझसे जन्मी,नंदिनी नाम रचे।
ऋषि वशिष्ठ की शक्ति, राजा दिलीप भजे ।।

इस श्लोक का अर्थ है – जो माता से जन्मी, उन्हें नंदिनी नाम दिया गया। उनकी शक्ति ऋषि वशिष्ठ से जुड़ी है, और राजा दिलीप उनकी भक्ति किया करते थे।

पाप विनाशिनी मैया,सुखद भंडार भरे।
तैंतीस कोटि दैवत,अंग निवास करे।।

इस श्लोक का अर्थ है – हे माँ, आप पाप नाश करने वाली हैं और अपने भक्तों के जीवन में सुख और समृद्धि का भंडार भरती हैं। आपकी इतनी शक्ति है कि 33 करोड़ (तैंतीस कोटि) देवी-देवताओं की शक्ति आपके अंगों में निवास करती है।

पंचगव्य है पावन,औषध गुणकारी।
रोग दोष मिटाए,मॉ तुम उपकारी ।।

इस श्लोक का अर्थ है – गौ माता की पंचगव्य (दूध, दही, घी, मूत्र और गोबर) पवित्र है और इसमें औषधीय गुण हैं। आप अपने भक्तों के रोग और दोष दूर करती हैं और हमेशा सहायता करने वाली हैं।

जिस घर अंगना धेनु,मॉं की हो सेवा।
वैतरणी तरते वो नर,पाते शुभ मेवा।।

इस श्लोक का अर्थ है – जिस घर की आंगन में गौ माता (धेनु) की सेवा की जाती है, उसके घर के व्यक्ति वैतरणी नदी को पार कर जाते हैं और उन्हें शुभ फल (सुख-समृद्धि और पुण्य) प्राप्त होते हैं।

शुभ मति शुभ फल दायक,है संकट त्राता ।
जो जन करते सेवा,मोक्ष सुफल पाता ।।

इस श्लोक का अर्थ है – गौ माता शुभ बुद्धि और शुभ फल देने वाली हैं, संकटों से रक्षा करती हैं। जो व्यक्ति उनकी सेवा करता है, उसे मोक्ष (उद्धार) का फल प्राप्त होता है।

आरती वंदना धेनु की,जो नर हैं गाते।
कहते हैं श्रीकृष्णा,वे मनु तर जाते।।

इस श्लोक का अर्थ है – जो व्यक्ति गौ माता की आरती और वंदना करते हैं, उनके बारे में कहा जाता है कि श्रीकृष्ण कहते हैं—ऐसे भक्त मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं और संकटों से पार पा जाते हैं।