कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश में सरकार बना तो ली, लेकिन जानकारों को लगता है कि वहां बनी राज्य सरकार पर कांग्रेस आलाकमान का कोई जोर नहीं चल रहा। यह बात ऐसे ही लोगों ने दिमाग में नहीं आई। बल्कि इसके पीछे अरुणाचल प्रदेश के नए सीएम पेमा खांडू का काम करने का तरीका और उनके कुछ फैसले हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 जुलाई को राष्ट्रपति शासन खत्म करने के बाद नबाम तुकी की सरकार को फिर से सत्ता में आने का मौका मिला। लेकिन उन्हें बहुमत साबित करना था। कांग्रेस को लग रहा था कि नबाम बहुमत साबित करने में फेल हो जाएंगे इसलिए उन्होंने नबाम को सीएम की कुर्सी से उतारकर 12 बागी विधायकों को पार्टी में शामिल कर लिया। ये 12 लोग नबाम के नेतृत्व से ही नाराज थे। उनके हटते ही ये सब फिर से पार्टी में शामिल हो गए। इन्हीं बागी विधायकों में एक यानी पेमा खांडू को कांग्रेस की तरफ से सीएम भी बना दिया गया।
अब सुनने में आ रहा है कि पेमा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बिना पूछे ही फैसले ले लेते हैं। पेमा पर आरोप है कि उन्होंने नबाम के एक भी सहयोगी को किसी पद पर नहीं रखा और अपने खास लोगों को ही चुना। बागी चौना मैन का उपमुख्यमंत्री बनना इसी बात का उदाहरण है। उन्होंने नबाम के खास नबाम रेबिया को स्पीकर पद से हटाकर अपने खास टेरसिंग नोर्बू थोंडुक को डिप्टी स्पीकर बना दिया है।
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हालांकि, अबतक यह साफ नहीं हुआ है कि पेमा को कांग्रेस में वापस लाने के लिए किसने मनाया था। कई लोगों का मामना है कि किसी सीनियर वकील की राय पर ऐसा किया गया है। पेमा ने अंत तक पता नहीं लगने दिया था कि वह किसके साथ हैं। 15 जुलाई तक वह बीजेपी के नेताओं के संपर्क में थे। उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर भी सरकार बनाने की कोशिश की थी। अरुणाचल के मुद्दे पर इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व ने कहा, ‘जो कुछ भी हुआ वह कानूनी प्रक्रिया थी। अरुणाचल की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।’

