यमुना प्राधिकरण में करोड़ों रुपये का एक घोटाले हुआ है। अधिकारियों व नेताओं ने साठगांठ कर जहांगीरपुर में किसानों से करीब 80 एकड़ जमीन कौड़ियों के दाम खरीद ली और दो महीने बाद ही सोने के दाम प्राधिकरण को बेचकर करोड़ों के वारे-न्यारे कर लिए हैं। यहां तक कि जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई है। अदालत के निर्देश के बाद भी 64.7 फीसदी मुआवजा नहीं दिया गया। सीधे रजिस्ट्री कराने वालों को अतिरिक्त मुआवजे के चेक जारी कर दिए गए। प्राधिकरण अधिकारियों ने जमीन खरीदने के लिए फेज एक के मास्टर प्लान की अनदेखी तक की है। इस जमीन को यूपीपीटीसीएल को सब स्टेशन के निर्माण के लिए दिया गया है। सपा सरकार के दबाव में घोटाले पर पर्दा पड़ा रहा। सीईओ डा. अरुणवीर सिंह ने संज्ञान में आने पर मामले की जांच शुरू करा दी।
यूपीपीटीसीएल ने 765 केवीए के सब स्टेशन के निर्माण के लिए यमुना प्राधिकरण से जमीन मांगी थी। इसके साथ ही घोटाले का खेल शुरू हो गया। सांसद, विधायकों व नेताओं ने प्राधिकरण अधिकारियों के साथ मिलकर घोटाले का तानाबाना बुन दिया। इसमें सपा और बसपा से जुड़े नेता शामिल बताएं जा रहे हैं। इन्होंने जहांगीरपुर के पास रातोंरात किसानों से कौड़ियों के भाव 80 एकड़ जमीन खरीद ली। किसानों को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि जमीन को यमुना प्राधिकरण के लिए खरीदा जा रहा है। किसानों से जमीन ढाई से तीन लाख रुपये प्रति बीघे की दर से खरीदी गई।
करीब दो महीने बाद ही अधिकारी और नेताओं ने जमीन को यमुना प्राधिकरण को सब स्टेशन के निर्माण के लिए बेच दिया। प्राधिकरण को यह जमीन 1850 रुपये प्रति वर्ग मीटर यानी 15 लाख 68 हजार रुपये प्रति बीघे की दर से बेची गई। जमीन के मूल मुआवजे के साथ नेता और अधिकारियों को कोर्ट के निर्देश के बिना 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा भी दे दिया गया। जबकि अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश सिर्फ अधिग्रहीत जमीन के लिए था। अतिरिक्त मुआवजा वितरण का सरकार से शासनादेश जारी होते ही सबसे पहले इसी जमीन का 64.7 फीसदी मुआवजा बांटा गया।
प्राधिकरण को इससे 64 करोड़ की चोट लगी। दूसरी तरफ कोर्ट के निर्देश के बावजूद किसानों को अभी अतिरिक्त मुआवजा नहीं मिला है। यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिरकार यूपीपीटीसीएल ने सब स्टेशन के लिए प्राधिकरण से जमीन क्यों मांगी। जमीन अधिग्रहीत कराने के लिए उसके पास प्रशासन का विकल्प मौजूद था। यमुना प्राधिकरण का गठन औद्योगिक विकास के लिए हुआ है न कि जमीन अधिग्रहण के लिए। प्राधिकरण के चैयरमेन का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जा रही है। अगर गड़बड़ी सामने आई तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

