यूपी में 122 सहायक इंजीनियर्स को उत्तर प्रदेश जल निगम से बर्खास्त किया गया है। खबर के अनुसार इन सहायक इंजीनियर्स की भर्ती में नियमों की अनदेखी की गई थी। मामले में हुई जांच पर इलाहबाद हाईकोर्ट ने माना कि नंवबर 2016 से जनवरी 2017 तक हुई इन भर्तियों में नियमों का उल्लंघन किया गया था। गौरतलब है कि ये भर्तियां अखिलेश सरकार में चुनाव से ठीक पहले हुई थीं। जल निगम के चेयरमैन जी पटनायक के अनुसार जांच-पड़ताल में सामने आया कि भर्तियों को लेकर प्रमुख अनियमितताएं सामने आईं हैं। इसमें राज्य सरकार के दिशा निर्देशों को भी फॉलो नहीं किया गया था। इससे अब पूरी भर्ती प्रकिया को अवैध घोषित कर दिया गया है। साथ ही निगम ने फैसला लिया है बर्खास्त किए गए सहायक इंजीनियर्स को दिए गए वेतन और भत्तों की रिकवरी नहीं होगी। वहीं रिक्त पदों की भर्ती भी बिना वित्त विभाग की अनुमति के नहीं की जाएगी। गौरतलब है कि रद्द हुईं भर्तियों में 113 पद सहायक इंजीनियर्स, पांच पद सहायक इंजीनियर्स मकेनिकल और चार पद सहायक इंजीनियर्स कंप्यूटर साइंस के थे।
बता दें कि मामले में दो सदस्यों के दल द्वारा की गई जांच में सामने आया कि भर्ती प्रक्रियां में गड़बड़ी की गई थी। इसमें कुछ अच्छे उम्मीदवारों को समान छात्रों की तरह अंक दिए गए। जबकि कुछ मामले में उम्मीदवारों के उत्तर भी एक जैसे थे। जबकि इनकी गलतियां भी एक समान थीं। साथ हीं परीक्षा का आयोजन करने वाली कंपनी ने वेबसाइट पर आंसर की अपलोड नहीं की थी। जिसपर आरटीआई दाखिल करने के बाद इसे जारी किया गया था। वहीं खबर के अनुसार जांच में ये भी सामने आया कि जल निगम में कंप्यूटर साइंस के सहायक इंजीनियर्स, इलेक्ट्रोनिक, इलेक्ट्रिकल और कम्यूनिकेशन के पद खाली नहीं थे। लेकिन बिना राज्य सरकार की अनुमति के इन पदों पर भर्तियां की गईं।
