नोएडा में रोजाना 300 टन निर्माण सामग्री का मलबा निकलता है। जिसे अभी तक कचरे के ढेर या सड़क किनारे डाला जा रहा है। पर्यावरणीय मानकों की इस अनदेखी पर एनजीटी समेत प्रदूषण नियंत्रण विभाग की सख्ती के अब तस्वीर बदलने जा रही है। नोएडा के सेक्टर-80 में मलबा निस्तारण संयंत्र लगने जा रहा है। जहां शहर से रोजाना निकलने वाले भवन मलबे का निस्तारण कर टाइल, पेवर ब्लाक और मोहर बनाई जाएगी। जिसका दोबारा निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के किसी भी शहर में अभी तक मलबा प्रबंधन संयंत्र नहीं लगा है। नोएडा के अलावा वाराणसी, गाजियाबाद आदि में भी इन्हें लगाए जाने की तैयारी है। चार महीने में संयंत्र के शुरू होने पर यह प्रदेश का पहला अत्याधुनिक मलबा प्रबंधन संयंत्र होगा।

मलबा प्रबंधन के लिए नोएडा ने हैदराबाद की एक कंपनी से करार किया है। जहां दो साल से मलबे को निस्तारित कर दोबारा निर्माण उत्पाद में तब्दील किया जा रहा है। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक सेक्टर- 80 में पांच एकड़ जमीन पर इस संयंत्र को लगाया जाएगा। मशीनें जर्मनी से मंगाई जा रही है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मलबा निस्तारण संयंत्र की क्षमता दोगुना तक बढ़ाई जा सकती है। भवन, इमारतों के मलबे का निस्तारण कर उनसे टाइल, फुटपाथ पर लगने वाले पेवर ब्लाक और डस्ट (मोहरम) बनाएगी जिनका दोबारा इस्तेमाल निर्माण में होगा। मलबे के निस्तारण से तैयार होने वाले उत्पाद का प्राधिकरण अपनी परियोजनाओं में इस्तेमाल करेगा। इसके अलावा ठेकेदार समेत अन्य लोग भी इन उत्पादों को कंपनी से खरीद सकेंगे।

1 मई से कंपनी अपने ट्रक और गाड़ियों से शहर के विभिन्न इलाकों से मलबे का उठाकर संयंत्र स्थल पर एकत्रित कर रही है। चार महीने में निस्तारण मशीनों के आने और संयंत्र को पूरी तरह से चालू करने की तैयारी है। करार के तहत कंपनी को प्राधिकरण ने सेक्टर-80 में भूमि हस्तांतरित कर दी है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कंपनी को अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल चुका है। समूचे शहर से निकलने वाले मलबे को डालने के लिए प्राधिकरण ने करीब 15 स्थल चिन्हित किए हैं। इन स्थलों पर आसपास के क्षेत्रों में निकलने वाले मलबे को डालना होगा। मलबा इक्टठा होने के बाद कंपनी के कर्मी उसे संयंत्र स्थल तक ट्रक समेत अन्य वाहनों से पहुंचाएंगे।

प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक फुटपाथ ब्लाक और सड़क किनारे लगने वाली टाइलों के रूप में मलबा निस्तारण संयंत्र में तैयार उत्पादों का इस्तेमाल किया जाएगा। पर्यावरणीय जानकारों के मुताबिक मलबा प्रबंधन भविष्य के लिए नितांत आवश्यक है। बड़े शहरों में महंगी होती जमीन के कारण पुराने मकानों को तोड़कर बहुमंजिला इमारतों में तब्दील करने की जरूरत इसकी महत्ता को बढ़ा रही है। मलबा निस्तारण संयंत्रों से निकलने वाली डस्ट (मोहरम जैसा पाउडर) रियल एस्टेट सेक्टर के लिए मददगार साबित हो सकता है।