केंद्र सरकार सोमवार को तीन तलाक विधेयक राज्यसभा में पेश करेगी। सरकार को उम्मीद है कि लोकसभा के बाद यह राज्यसभा में भी पारित हो जाएगा। दूसरी ओर, कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल सरकार की उम्मीदों को झटका देने की कोशिश में हैं। कांग्रेस ने तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पारित नहीं होने देने की घोषणा की है। ऐसे में राज्यसभा में इस विधेयक पर मतविभाजन के आसार देखते हुए भाजपा एवं कांग्रेस- दोनों ही दलों ने तीन लाइन का व्हिप जारी कर अपने सदस्यों को राज्यसभा में मौजूद रहने को कहा है। विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ऊपरी सदन में इस विधेयक को पेश करेंगे। विधेयक को गुरुवार को विपक्ष के बहिर्गमन के बीच लोकसभा द्वारा मंजूरी दी जा चुकी है। विधेयक के पक्ष में 245 जबकि विपक्ष में 11 वोट पड़े थे। रविशंकर प्रसाद ने उम्मीद जताई है कि भले ही राज्यसभा में भाजपा नीत राजग के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं हो, लेकिन सदन में इस विधेयक को समर्थन मिलेगा। विधेयक को सोमवार को राज्यसभा के विधायी एजंडे में शामिल किया गया है।
दूसरी ओर, विपक्ष ने तीन तलाक विधेयक के कई प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष इस विधेयक पर और गौर करने के लिए इसे संसद की ‘संयुक्त प्रवर समिति’ के पास भेजने की मांग कर रहा है। प्रस्तावित कानून में, एक बार में तीन तलाक को गैरकानूनी ठहराया गया है और ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास का प्रावधान है। कांग्रेस के नेताओं ने कह रखा है कि वे अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर इस विधेयक को सदन में पारित होने से रोकेंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआइसीसी) महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि 10 विपक्षी दल लोकसभा में मुसलिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2018 के खिलाफ खुलकर सामने आए थे। यहां तक कि अन्नाद्रमुक सहित जो दल विभिन्न मुद्दों पर सरकार का समर्थन करते हैं, उन्होंने भी विधेयक का विरोध किया।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के मुताबिक, पार्टी ने राज्यसभा में अपने सदस्यों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। तीन लाइन का व्हिप महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे कठोर कहा जाता है। इसका इस्तेमाल अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दे के लिए किया जाता है। इसका उल्लंघन करने वाले सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जाती है। कांग्रेस का कहना है कि तत्काल तीन तलाक एक दीवानी मामला है। इसके लिए अपराधियों की तरह कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, जो कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों को मंजूर नहीं है। यह बिल महिलाओं का सशक्तीकरण नहीं करेगा। इसके प्रावधान संविधान और मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं।
राज्यसभा में गणित
राज्यसभा में आंकड़ों के हिसाब से इस समय राजग के पास 93 सांसद हैं। कांग्रेस की अगुआई वाले विपक्षी खेमे के पास 112 सांसद हैं। इस लिहाज से अन्नाद्रमुक के 13, बीजद के नौ, टीआरएस के छह और वाईएसआर कांग्रेस के दो सदस्यों के समर्थन के बिना एनडीए सरकार राज्यसभा में तीन तलाक बिल पारित नहीं करा सकती।
