जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में सत्र 2019-20 में एमए, एमफिल और पीएचडी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा जिस पर छात्र संघ ने सवाल उठाए हैं। छात्र संघ की ओर से ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा में धांधली की भी आशंका जताई गई है। साथ ही कहा गया है कि यह फैसला एक नए घोटाले को जन्म देगा। छात्र संघ को शिक्षक संघ का भी समर्थन मिल रहा है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

जेएनयू छात्र संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर कहा कि ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा को लागू करने के प्रस्ताव को अलोकतांत्रिक तरीके से विद्वतपरिषद (एसी) की बैठक में पास किया गया है। उनके मुताबिक, जिस समिति ने ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा पर काम किया गया, उसके दो प्रोफेसर सदस्यों पर थीसिस चोरी करने का आरोप लगा है। छात्र संघ अध्यक्ष एन सार्इं बालाजी ने बताया कि प्रशासन ने जल्दबाजी में ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन परीक्षा से सबसे अधिक नुकसान दूर-दराज के क्षेत्रों के छात्रों को होगा।

बालाजी ने कहा कि प्रशासन की ओर से फैसला किया गया है कि विश्वविद्यालय के बाहर से विशेषज्ञ प्रश्नपत्र तैयार करेंगे जबकि हमेशा से प्रवेश परीक्षा का पेपर जेएनयू के शिक्षक ही तैयार करते हैं। यह गलत है। छात्र संघ की उपाध्यक्ष सारिका ने कहा कि क्या गारंटी है कि ऑनलाइन परीक्षा लीक नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्रों को होगी, जिन्हें अपनी भाषा के अलावा किसी और भाषा का ज्ञान नहीं है। ऐसे में उन्हें परीक्षा देने में काफी दिक्कत होगी। बालाजी ने कहा कि इस मामले को लेकर वे प्रशासन को एक पत्र देंगे और उसे ऑनलाइन परीक्षा की खामियों से अवगत कराएंगे। अगर इसके बाद भी प्रशासन छात्र संघ की बात नहीं सुनेगा तो हम इसके विरोध में कानूनी और राजनीतिक तरीके से लड़ाई लड़ेंगे।

ऑनलाइन नहीं कंप्यूटर आधारित होगी परीक्षा
छात्र संघ के आरोप के जवाब में जेएनयू प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा ऑनलाइन नहीं बल्कि कंप्यूटर आधारित होगी। इसके लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी। जेएनयू के कार्यकारी रजिस्ट्रार की ओर से बताया गया कि यह उम्मीदवार के कंप्यूटर कौशल या टाइपिंग की परीक्षा नहीं है। कंप्यूटर नहीं जानने वाले उम्मीदवार भी माउस के कुछ क्लिक के जरिए परीक्षा दे सकेंगे। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जेएनयू ऐसा पहला विश्वविद्यालय नहीं है जहां इस तरह की परीक्षा आयोजित होगी। इससे पहले डीयू, आइआइटी और एम्स में भी ऐसी परीक्षाएं आयोजित होती रही हैं।