गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि त्रिपुरा में राष्ट्रीय नागरिक पंजिका (एनआरसी) लागू करने की कोई योजना नहीं है। गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि फिलहाल यह कानून सिर्फ असम के लिए है। अन्य राज्यों के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान के लिए असम में इस तरह का अभियान चलाया गया है। पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों, बंगाल और झारखंड में एनआरसी के मुद्दे पर हाल में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कोलकाता में मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई थी। उस बैठक में त्रिपुरा के एक राजनीतिक धड़े के प्रतिनिधिमंडल ने सिंह से मुलाकात के बाद दावा किया था कि उनके राज्य में एनआरसी की कवायद शुरू की जाएगी। इसके बाद उठे विवाद पर गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को बयान जारी कर सफाई दी।
गह मंत्रालय के बयान में कहा गया कि ‘इंडिजिनस नेशनलिस्ट पार्टी आफ त्रिपुरा’ (आइएनपीटी) के अध्यक्ष बिजॉय कुमार हरांगखवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की, लेकिन राज्य में एनआरसी लागू करने के संबंध में दल को कोई आश्वासन नहीं दिया गया। बयान में कहा गया है- गृह मंत्री ने चार अक्तूबर को आइएनपीटी के अध्यक्ष बिजॉय कुमार हरांगखवाल के नेतृत्व एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। गृह मंत्री ने त्रिपुरा में एनआरसी को लागू करने के संबंध में किसी तरह का कोई आश्वासन नहीं दिया। यह स्पष्ट किया जाता है कि त्रिपुरा में एनआरसी के मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं किया गया है। मंत्रालय यह भी कहा कि त्रिपुरा में एनआरसी को लागू किए जाने की संभावना के बारे में आ रहे समाचार पूरी तरह से अनुचित और गलत हैं। राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद हरांगखवाल ने कहा था कि त्रिपुरा में बड़ी संख्या में बांग्लादेश से आए अवैध घुसपैठिए हैं। हमने गृह मंत्री से निवेदन किया कि त्रिपुरा में भी असम की तरह राष्ट्रीय नागरिक पंजिका (एनआरसी) लागू की जाए। हरांगखवाल ने दावा किया कि गृह मंत्री ने इस मांग पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है। हरांगखवाल के इस दावे के बाद कुछ अखबारों और टीवी चैनलों में इस आशय की खबरें चलीं कि केंद्र ने त्रिपुरा में एनआरसी लागू करने का फैसला किया है।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कानून के मुताबिक एनआरसी सिर्फ असम के लिए है। सरकार उसी कानून के तहत काम कर रही है। राम माधव ने अवैध घुसपैठियों के मामले पर कहा कि हिंदू हो या मुसलमान, सभी रोहिंग्यों को देश से बाहर करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि हम संवैधानिक तरीके से काम कर रहे हैं और गैर संवैधानिक ढंग से देश में आए किसी भी व्यक्ति को हम पनाह नहीं देंगे। असम की एनआरसी में जिनके नाम नहीं आए हैं, उनके बारे में माधव ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को देश से निकालने की तैयारी नहीं है। भारत किसी गैर-भारतीय को देश में बसने नहीं देगा, लेकिन इतना ध्यान रखा जाएगा कि इस प्रक्रिया में देश का एक भी नागरिक परेशान न हो। उन्होंने कहा कि पिछले साल सऊदी अरब ने 7000 लोगों को बाहर निकाला। कोई भी देश दूसरों के लिए अपनी जमीन के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दे सकता।
