प्रतिष्ठित ई-अदालत परियोजना के लिए अपने-अपने उच्च न्यायालयों को धन जारी नहीं कर रहे राज्यों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय कानून मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने राज्यों से तुरंत धन जारी करने के लिए कहा है। सभी मुख्यमंत्रियों को लिखे एक पत्र में गौड़ा ने कहा है कि राज्यों को 202.23 करोड़ रुपए आबंटित किए गए थे ताकि ई-अदालत परियोजना से जुड़े उपकरण खरीदने के लिए उच्च न्यायालयों को यह धन उपलब्ध करवाया जा सके।
पत्र में गौड़ा ने कहा-ऐसा लगता है कि कुछ राज्य सरकारों ने उच्च न्यायालयों को कोष उपलब्ध नहीं करवाए हैं। परियोजना के निर्बाध संचालन के लिए कोष तुरंत ही जारी किए जा सकते हैं और पर्याप्त तकनीकी श्रमबल भी उपलब्ध करवाया जा सकता है। देश में 24 हाईकोर्ट हैं। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से यह भी अपील की कि वे तत्काल कदम उठाएं और उन्हें इस संदर्भ में समय के साथ होने वाली प्रगति की जानकारी दें।
हालांकि गौड़ा ने उन राज्यों का नाम नहीं लिया जो हाईकोर्ट को कोष उपलब्ध करवाने में नाकाम रहे हैं। राज्यों द्वारा उच्च न्यायालयों को कोष उपलब्ध करवाने में विफल रहने की बात 24 अप्रैल को राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के बीच संयुक्त सम्मेलन के दौरान उठाई गई थी। ‘ई-कोर्ट्स इंटीग्रेटेड मिशन मोड प्रोजेक्ट’ राष्ट्रीय ई-शासन परियोजनाओं में से एक है, जिसे भारत के उच्च न्यायालयों और जिला (निचली) अदालतों में लागू किया जा रहा है।
इस परियोजना का उद्देश्य देश की जिला एवं निचली अदालतों में सूचना संचार प्रौद्योगिकी के जरिए वादियों, वकीलों और न्यायपालिका को निर्दिष्ट सेवाएं उपलब्ध करवाना है। कानून मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा तैयार नोट के अनुसार एक मार्च 2016 को 95 फीसद से ज्यादा अनिवार्य कार्यों को पूरा कर लिया गया था। परियोजना के तहत, 14,309 न्यायिक अधिकारियों को लैपटॉप उपलब्ध करवाए गए।
सभी कंप्यूटरीकृत अदालतों में लगाने के लिए एकीकृत राष्ट्रीय एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर- केस इंफॉर्मेशन सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है और उपलब्ध करवाया गया है। पिछले मामलों के बारे में डाटा की एंट्री का काम शुरू हो चुका है और 5.5 करोड़ से ज्यादा मामलों का डेटा आॅनलाइन उपलब्ध है।
