कालेधन पर बने विशेष जांच दल (एसआइटी) के प्रमुख का मानना है कि मौजूदा समय में सरकार द्वारा कालाधन का खुलासा करने के लिए शुरू की गई एक बार की अनुपालन खिड़की के तहत बिना कर चुकाई संपत्ति का खुलासा नहीं करना मुश्किल हो जाएगा। गौरतलब है कि पिछले साल ऐसी ही एक योजना की सीमित सफलता के बाद सरकार ने इसे विदेशों में धन जमा करने वाले लोगों के लिए दोबारा लागू किया है।
एसआइटी के चेयरमैन सेवानिवृत्त जज एमबी शाह ने कहा कि आयकर विभाग ने मौजूदा योजना के तहत हर दृष्टिकोण पर कड़ी नजर रखी है और इसलिए इस योजना के तहत खुलासा नहीं करना सौ फीसद मुश्किल होगा। शाह का कहना था कि पिछली ऐसी योजना सफल नहीं हुई थी या यूं कहें कि यह कुछ हद तक ही सफल रही थी जिसमें यह ध्यान रखा गया था कि यदि कुछ पाया गया तो (बाद के चरण में) मुकदमा चलाया जाएगा।
जिसका एक हद तक निवारक प्रभाव रहा था। लेकिन इस बार इस योजना से कर चोरों के लिए काफी मुश्किल होगी।उन्होंने कहा कि पी-नोट्स के मुद्दे को भी काफी हद तक नियंत्रित किया गया है। जिससे कर की चोरी करना आसान नहीं रहा है। पिछले साल एसआइटी ने ही बाजार नियामक सेबी से पी-नोट्स के विनियमन की बात कही थी।

