राजस्थान में जारी सियासी उठापटक के बीच हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाक़ात की। इस दौरान उनके समर्थन वाले विधायकों ने राजभवन को घेर लिया और धरना प्रदर्शन किया। जिसके बाद गहलोत ने मंत्रीमंडल के साथ देर रात तक बैठक की। जिसमें तय किया गया कि विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए राज्य सरकार अब राज्यपाल को एक बार फिर प्रस्ताव भेजेगी।

‘पत्रिका’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को राज्यभावन में धरना प्रदर्शन के बाद मंत्रीमंडल की बैठक बुलाई गई थी। देर रात तक चली इस बैठक में 23 जुलाई को राज्यपाल कलराज मिश्रा को भेजे गए प्रस्ताव की कामियां दूर कर फिर से प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया है। इस नए प्रस्ताव में राज्यपाल की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब पर भी मंथन किया जाएगा। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए आज फिर बैठक की जाएगी।

शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से सत्र बुलाने के लिए भेजे गए प्रस्ताव को राज्यपाल ने अनुमति नहीं दी थी। जिसके बाद सीएम गहलोत कांग्रेस व अन्य विधायकों को चार बसों में भरकर राज्यभवन पहुंचे थे। राज्यपाल से नाराज़ विधायकों ने राज्यभावन को घेर लिया था और अघोषित धरने पर बैठ गए थे।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि अगर जनता राजभवन का घेराव करती है तो मेरी जिम्मेवारी नहीं होगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्यपाल ने अपनी सुरक्षा पर चिंता जाहिर की थी।

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा, ‘दवाब की राजनीति नहीं होनी चाहिए। संवैधानिक मर्यादा के ऊपर कोई नहीं है।’ राज्यपाल ने कांग्रेस विधायकों को आश्वस्त किया है कि वह इस मामले में बिना किसी दबाव और द्वेष के संविधान का अनुपालन करेंगे।