Punjab News: पंजाब के मुक्‍तसर में शिक्षा विभाग से पैसे नहीं मिलने के कारण प्रखंड स्तरीय शासकीय प्राथमिक विद्यालयों में चल रहे खेलों के लिए शिक्षक अपनी जेब से योगदान कर रहे हैं। मुक्तसर डीईओ (प्राथमिक) प्रभजोत कौर के अनुसार, ब्लॉक स्तर के खेल स्कूल में चल रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक हमें पैसे उपलब्ध नहीं कराया है।

द ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक ने कहा कि प्रत्येक स्कूल को छात्रों के जलपान और परिवहन, पुरस्कार और अन्य व्यवस्थाओं पर लगभग 5,000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। शिक्षक ने कहा, “सरकार सिर्फ खेलों को आयोजित करने का आदेश देती है, लेकिन हमें कभी पैसे नहीं देती है। बिना पैसे के हर बार खेलों का आयोजन कैसे संभव है? छात्रों के पास खेलों में भाग लेने के लिए जरूरी ड्रेस तक नहीं है। राज्य सरकार को खेलों को बढ़ावा देने के लिए पैसे आवंटित करना चाहिए।”

कई तरह के खेलों का होता है आयोजन

एक अन्य सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक ने कहा, “एथलेटिक्स, जिमनास्टिक, शतरंज, कराटे, स्केटिंग, कबड्डी, खो-खो, कुश्ती, फुटबॉल और तैराकी सहित खेल आयोजित किए जा रहे हैं। मैच आयोजित करने की तैयारी, छात्रों का परिवहन और पुरस्कार राशि का बड़ा हिस्सा खर्च करते हैं। हम स्कूल स्तर पर पैसे का योगदान करते हैं और फिर इसे टूर्नामेंट आयोजन समिति को देते हैं।”

“स्कूलों में शारीरिक शिक्षा शिक्षक का कोई पद नहीं”

इस बीच ईटीटी शिक्षक संघ, मुक्तसर के अध्यक्ष रंजीत सिंह ने कहा, “विभाग हमें क्लस्टर, ब्लॉक या जिला स्तर पर खेलों को आयोजित करने के लिए पैसे उपलब्ध नहीं कराता है। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा शिक्षक का कोई पद नहीं है, भले ही कुछ संस्थानों में 400 छात्रों की संख्या हो।”

केंद्र सरकार ने 2022-23 में बढ़ाया खेल का बजट

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने इस साल के बजट में पिछले साल की तुलना में खेल पर ज्यादा खर्च करने का ऐलान किया है। पिछले साल टोक्यो में आयोजित किए गए ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। जिसके बाद इस बार के बजट में सरकार ने इस बात को ध्यान में रखते हुए खेल के बजट में 305.58 करोड़ रुपयों की बढ़ोत्तरी कर दी थी। सरकार वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए खेलों के लिए कुल 3,062.60 करोड़ रुपए आवंटित किए।