भूमि संसाधन विभाग के जरिए बंजर भूमि संबंधी एटलस को अद्यतन बनाने के लिए कोई समयसीमा नहीं बताने से खिन्न संसद की एक समिति ने अपनी सिफारिश को दोहराया। समिति ने कहा कि बंजर भूमि एटलस को पूरा करने के लिए कोई समयसीमा बताई जाए व केंद्र को राज्यों की पहल के अलवा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति ने देश में बढ़ते रेगिस्तान को रोकने के लिए अधिकाधिक परियोजनाएं शुरू करने की सिफारिश की थी। समिति ने भूमि संसाधन विभाग से देश की पनधारा एटलस 2011 में उपलब्ध आंकड़ों को भी शीघ्रातिशीघ्र अद्यतन करने व इसे सार्वजनिक करने को कहा था।
समिति ने प्रभावी निगरानी के लिए यह सिफारिश की थी कि आइडब्ल्यूएमपी परियोजनाओं के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए जियो पोर्टल सृष्टि व मोबाइल एप दृष्टि को बढ़ावा दिया जाए। विभाग ने अपनी कार्यवाही के बारे में बताया कि देश में 2008-09 और 2015-16 के बीच बंजरभूमि के परिवर्तन के विश्लेषण को अद्यतन बनाने का कार्य राष्ट्रीय दूरसंवेदी केंद्र, हैदराबाद को फरवरी 2016 में सौंपा था। विभाग ने बताया कि मोबाइल एप दृष्टि को सार्वजनिक किया जा चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति यह जानकर दुखी है कि भूमि संसाधन विभाग ने बंजर भूमि संबंधी एटलस को अद्यतन बनाने के लिए समयसीमा नहीं बताई और बिना किसी वैज्ञानिक आंकड़े के समस्याग्रस्त क्षेत्रों की पहचान कर पाना और इस संबंध में हुई प्रगति के बारे में जान पाना संभव नहीं होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग ने सृष्टि और दृष्टि को लोकप्रिय बनाने के लिए कुछ नहीं किया तथा यह भी नहीं बताया कि वे अधिक परियोजनाओं को शुरू करने को इच्छुक है या नहीं।
विभाग ने केवल राज्यों के कार्यक्रम गिनाए। समिति ने अपनी सिफारिश को दोहराया है कि बंजर भूमि एटलस को पूरा करने के लिए कोई समयसीमा बताई जाए और केंद्र को राज्यों की पहल के अलावा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि भूमि राज्य का विषय है, यह सिफारिश की थी कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न स्तरों पर आवश्यक उन्नयन और बढ़ोतरी के लिए राज्य व संघ राज्य क्षेत्रों के साथ नियमित समन्वय किया जाए। विभाग ने बताया कि उन्होंने हरियाणा के जींद जिले में भूमि अभिलेखों को आधार सक्षम बनाने के लिए एक प्रायोगिक परियोजना शुरू की है। समिति यह देख करके निराश है कि विभाग इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के साथ समन्वय तंत्र के बारे में मौन है। इसलिए समिति राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के साथ एक समयबद्ध तरीके से बेहतर समन्वय करने की अपनी सिफारिश को दोहराती है जो कि इस कार्यक्रम की सफलता के लिए महत्त्वपूर्ण है।

