हर किसी का अपना एक सपना जरूर होता है जिसे वो अपनी जिंदगी में पूरा करने की चाहत रखता है। कई बार अपने करियर की ऊंचाईयों को छूने के लिए हम अपने सपने से दूर होते चले जाते हैं। ऐसे में हमारा सपना धुंधला हो जाता है और फिर दम तोड़ देता है। लेकिन इस दुनिया में कई ऐसे लोग होते हैं जो करियर की आपा-धापी के बावजूद अपने सपने को मरने नहीं देते हैं और उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। लेकिन क्या आप कभी एक अच्छा-खासा करियर होने के बाद चाय को बिजनेस के तौर पर अपनाने के बारे में सोच सकते हैं। आप कहेंगे ये क्या बेवकूफी है। चाय के करियर में इतना टर्नओवर कहां है जिसे कि बिजनेस इनिशिएटिव के तौर पर अपनाया जा सके। लेकिन 26 साल की उपमा ने इसी चाय को ना केवल बिजनेस के तौर पर अपनाया बल्कि इसकी वजह से उन्हें ऑस्ट्रेलिया में एक नई पहचान भी मिली है। इतनी ही नहीं उन्हें हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की बिजनेसवूमेन ऑफ द ईयर 2016 के अवॉर्ड से भी नवाजा गया है।
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भारतीय मूल की उपमा पेशे से वकील हैं। चंढीगढ़ में जन्मी विरदी ने ऑस्ट्रेलिया में चाय वाली नाम से आयुर्वेदिक चाय का बिजनेस शुरू किया था। पिछले हफ्ते सिडनी में उन्हें Indian Australian Business and Community Awards श्रेणी में अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया। चाय वाली की फाउंडर होने के साथ ही विरदी एक सफल बिजनेस लीडर भी हैं। ऑस्ट्रेलिया में हुए टी फेस्टिवल में उन्हें विशेष तौर पर बुलाया गया था। जहां उन्होंने कहा था कि मेरा इरादा दुनिया को यह बताने का है कि भारतीय चाय सबसे बेहतर होती है क्योंकि इसे स्वादिष्ट बनाने के लिए हम इसमें लौंग, इलायची, अदरक आदि चीजों का इस्तेमाल करते हैं।
चंढ़ीगढ़ में उपमा के दादाजी आयुर्वेदिक दवाएं बेचते हैं। यहीं उन्होंने आयुर्वेदिक चाय बनाने का नुस्खा सीखा था। विरदी ने कहा कि मैंने अपने दादा जी से ही शिक्षा ली कि हमें चाय में कौन से मसालों की कितनी मात्रा डालनी चाहिए। इसके साथ ही यह भी जाना कि गर्मियों और सर्दियों में किस तरह चाय के लिए अलग-अलग मसाले इस्तेमाल में लाए जाते हैं। विरदी ने सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए चाय बेचने की शुरुआत की थी।
