इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की हरियाणा के गोहाना में रविवार को हुई रैली पर पारिवारिक कलह हावी रही। इस रैली में सांसद दुष्यंत सिंह चौटाला के कथित समर्थकों ने हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला के भाषण के दौरान जमकर शोरशराबा किया। चाचा-भतीजे के बीच की सियासी रार के इस कदर खुलकर सामने आ जाने से मंच पर मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश चौटाला बिफर पड़े। पार्टी की सद्भावना सम्मान दिवस रैली के दौरान प्रतिपक्ष के नेता अभय चौटाला जब भाषण दे रहे थे तो भीड़ में मौजूद लोगों ने बाधा डालने के लिए शेरशराबा शुरू कर दिया।
ये लोग दुष्यंत चौटाला के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे। इन लोगों ने इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा के भाषण के दौरान भी खूब शोरशराबा किया। आलम यह था कि हजारों लोग के शोरशराबे में यह सुनना मुश्किल था कि अभय चौटाला बोल क्या रहे हैं। इस स्थिति से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री चौटाला ने हूटिंग करने वालों के खिलाफ बेहद तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि सिर्फ तालियां पीटने या नारे लगाने से राज नहीं बना करते। यदि ऐसा होता तो मैं अकेला ही नारे लगाकर राज बना लेता। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने नारेबाजी करने वाले कार्यकर्ताओं को दो टूक कहा कि यदि उन्होंने अपना रवैया नहीं सुधारा तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। उनका यह इशारा उन लोगों की तरफ था, जो चाचा-भतीजे के बीच माहौल खराब करने में जुटे हैं।
चाचा और भतीजे के बीच विरासत की लड़ाई लंबे समय से अंदरखाने चल रही है। लेकिन यह पहला मौका है जब दोनों के बीच सियासी विरासत को लेकर मची रार सामने आ गई है। गोहाना रैली को लेकर पिछले कई दिनों से हरियाणा के साथ-साथ इनेलो की राजनीति गरमाई हुई थी। इसे लेकर अभय चौटाला व संसदीय दल के नेता दुष्यंत चौटाला के बीच लकीरें खींची थीं। रैली से करीब एक महीने पहले पहले से चाचा-भतीजा में पोस्टर युद्ध छिड़ा हुआ था। दुष्यंत समर्थकों ने गोहाना व आसपास के इलाकों में पोस्टर लगाकर जहां अभय चौटाला को गायब करते हुए दुष्यंत को भावी मुख्यमंत्री करार दिया वहीं अभय समर्थकों ने सिरसा व आसपास के इलाकों में दुष्यंत को अपने पोस्टरों से गायब कर दिया।
रैली में कई अवसर ऐसे आए जब दुष्यंत सियासी ताकत दिखाने में कामयाब रहे लेकिन मंच पर अभय समर्थकों का कब्जा रहा और मुख्य मंच के होर्डिंग से दुष्यंत का फोटो ही गायब कर दिया। वहां ताऊ देवी लाल व अभय की फोटो का साइज एक-जैसा दिखाकर दोनों को समान दिखाया गया। ओम प्रकाश चौटाला की छवि एक बेहद तल्ख व आक्रामक नेता की रहती आई है लेकिन रविवार को उनके भाषण से यह छवि पूरी तरह से गायब थी और उन्होंने पूरे भाषण के दौरान तीन बार विनम्रता व आग्रह जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
रैली में गुटबाजी ऐसी थी कि शनिवार जहां दुष्यंत समर्थकों ने अभय की मौजूदगी में नारेबाजी की वहीं रविवार सुबह से ही अभय समर्थकों ने मुख्य मंच की पहली कतार पर लगी कुर्सियों पर कब्जा जमा लिया था। यह रैली की प्रदेश की राजनीति में कम और इनेलो में ज्यादा नए समीकरण पैदा कर गई। रैली से दुष्यंत चौटाला ने खुद को हरियाणा में राज्यस्तरीय नेता के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया। रविवार को इनेलो के मंच पर वही समीकरण दिखाई दिए जो 2005 में सत्ता से बाहर होने के बाद गढ़ी सांपला व महम में रैलियों में बने थे। इनेलो का मीडिया विंग औपचारिकता निभाता रहा वहीं दुष्यंत का मीडिया विंग पूरी तरह से सक्रिय रहा।

