केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि प्रिंट मीडिया क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व विकास से पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रिंट मीडिया से जुड़े दिशा-निर्देशों में ढेरों बदलाव हुए हैं और बदलते आयामों के मद्देनजर नीतियों को नया रूप देने की जरूरत है। नायडू ने कहा कि आरएनआइ के मजबूत तंत्र से अवैध प्रकाशनों को समाप्त करने में भी मदद मिली। नई प्रिंट विज्ञापन नीति की रूपरेखा का उल्लेख करते हुए वेंकैया नायडू ने कहा कि डीएवीपी में समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं के पैनल के लिए सर्कुलेशन सत्यापन प्रक्रिया की व्यवस्था इसमें की गई है। इस प्रक्रिया में आरएनआई द्वारा प्रमाणन शामिल है, बशर्ते कि सर्कुलेशन प्रति प्रकाशन दिवस पर 45,000 प्रतियों से अधिक हो जाए।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार का विजन राष्ट्र को सतत विकास के पथ पर अगसर करना है। सरकार सुधार, प्रदर्शन एवं बदलाव के मंत्र के साथ देश में रूपांतरणीय बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस विजन को भारत सरकार के कैलेंडर 2017 में दर्शाया गया है। इस कैलेंडर की थीम-मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है। वेंकैया नायडू ने भारत में प्रेस संबंधी रिपोर्ट 2015-16 भी जारी की, जिसे भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक ने तैयार की है। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
नायडू ने यह भी घोषणा की कि सरकार इस साल 25 दिसंबर से सुशासन की थीम पर देश भर में 100 दिनों का एक अभियान चलाएगी। इस दौरान मंत्रीगण एवं सांसद देश भर की यात्रा कर सरकार के उन महत्वपूर्ण कदमों पर प्रकाश डालेंगे जो पिछले ढाई वर्षो में उठाए गए हैं। सुशासन दिवस पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस पर मनाया जाता है। इस संदर्भ में सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि सरकार वितरण प्रणालियों की बेहतरी के लिए प्रयासरत है और इसके साथ ही डिजिटल बदलाव को बढ़ावा देने तथा सभी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी क्रांति को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
केंद्रीय मंत्री ने आरएनआई की वार्षिक रिपोर्ट के आधार पर भारतीय प्रिंट मीडिया की सामान्य प्रवृत्ति का व्यापक विश्लेषण भी पेश किया। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रिंट उद्योग ने पिछले वर्ष के मुकाबले 5.13 प्रतिशत की स्थिर दर से अपनी विकास गाथा को बरकरार रखा। वर्ष 2015-16 के दौरान कुल मिलाकर 5,423 नए प्रकाशनों का पंजीकरण कराया गया और पंजीकृत प्रकाशनों की कुल संख्या 31 मार्च, 2016 को 1,10,851 दर्ज की गई। सर्कुलेशन का ब्यौरा देते हुए नायडू ने कहा कि हिंदी प्रकाशनों ने प्रति प्रकाशन दिवस पर 31,44,55,106 प्रतियों के साथ अपनी अगुवाई का क्रम जारी रखा। इसके बाद प्रति प्रकाशन दिवस पर 6,54,13,443 प्रतियों के साथ अंग्रेजी प्रकाशनों और 5,17,75,006 प्रतियों के साथ उर्दू प्रकाशनों का स्थान रहा।
