सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को जेईई (एडवांस) के तहत अब आगे आईआईटी काउंसलिंग व दाखिले पर रोक लगाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि देश का कोई उच्च न्यायालय अब से जेईई-आईआईटी (एडवांस) पर किसी याचिका पर विचार नहीं करेगा।
अदालत ने उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल से शनिवार तक उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित जेईई-आईआईटी (एडवांस) से जुड़ी याचिकाओं की संख्या व मामलों की प्रकृति की सूचना देने का निर्देश दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने बीते शुक्रवार को केंद्र से आईआईटी-संयुक्त प्रवेश परीक्षा (आईआईटी-जेईई) के एडवांस कोर्स में सभी उम्मीदवारों को अतिरिक्त सात अंक दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा था। यह अतिरिक्त सात अंक हिदी भाषा के प्रश्नपत्र में प्रिंटिंग की गलती के मद्देनजर दिए गए।
इससे पहले इस मामले में शीर्ष अदालत ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए काउंसलिंग में दखल देने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने आईआईटी-मद्रास को भी नोटिस जारी किया था, जिसने 2017 के लिए परीक्षा का आयोजन किया था।
छात्रों के तरफ अदालत में पेश वरिष्ठ वकील सुषमा सूरी ने न्यायालय से अनुरोध किया कि वह इस तरह का निर्देश दे कि सभी दाखिले अदालत में दायर याचिक पर अंतिम फैसले के अनुरूप होंगे।
यह याचिका उन छात्रों ने दायर की है, जिनके नतीजों पर सभी छात्रों को सात अतिरिक्त अंक दिए जाने से प्रतिकूल असर पड़ सकता है। परीक्षा में बैठने वाले सभी अत्यर्थियों को सात अंक दिए गए। इनमें से तीन अंक रसायन विज्ञान के लिए और चार अंक गणित के लिए दिए गए।

