केरल के मलाप्पुरम कलेक्ट्रेट परिसर में धमाके के दो दिन बाद जांच में तेजी आई है। जांचकर्ताओं को एक पत्र मिला है, जिसमें ऐसे ही दूसरे बम धमाके और दादरी कांड में मोहम्मद अखलाक की हत्या का बदला लेने की धमकी दी गई है। इसके अलावा मौके से मिली पेन ड्राइव में पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीरें और बाबरी मस्जिद विध्वंस के वीडियोज भी बरामद किए गए हैं। जांच कर रही एजेंसियों का मानना है कि तमिलनाडु के आतंकी समूह ‘अल-उमाह’, जो कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के तुरंत बाद अस्तित्व में आया था, ही इन धमाकों के पीछे है। जांच के दौरान, धमाके वाली जगह से एक बक्सा और एक पेन ड्राइव बरामद की गई। पेन ड्राइव में पीएम मोदी की तस्वीरें हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा था कि वह ‘बेस मूवमेंट’ (अल उम्माह का दूसरा नाम) की हिट लिस्ट में हैं। बेस मूवमेंट को 1998 के कोयंबटूर बम धमाकों के बाद प्रतिबंधित कर दिया गया था। पेन ड्राइव में बाबरी मस्जिद विध्वंस, गुजरात दंगों, मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन और दादरी में भीड़ के शिकार हुए अखलाक की तस्वीरें मिलीं। पेन ड्राइव में एक संदेश भी है जिसमें कहा गया है कि ‘बेस मूवमेंट’ महाराष्ट्र और तमिलनाडु में अदालतों पर ऐसे और हमले कराएगा। अल-उम्माह ने 1998 में कोयंबटूबर में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को मारने की कोशिश की थी।
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‘बेस मूवमेंट’ ने धमकी दी है कि और धमाके होंगे। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हाल के दिनों में चित्तूर, मैसूर, कोल्लम में कम तीव्रता के धमाकों के पीछे इसी समूह का हाथ था और धमकियां दी गई थीं। जिस तरह का बॉक्स मंगलवार को मल्लापुरम बम धमाके वाली जगह से मिला, वैसा ही बॉक्स सितंबर में नेल्लोर बम धमाके वाली जगह से भी मिला था। पिछले नौ महीनों में, तीन दक्षिणी राज्यों में इसी तरह से अाईईडी धमाके हुए हैं। राहत की बात यह है कि इनमें किसी को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ी।
इस श्रृंखला की शुरुआत आंध्र प्रदेश के चित्तूर से हुई थी, जहां अप्रैल में एक स्थानीय अदालत परिसर में धमाका हुआ था। दूसरा धमाका जून में केरल के कोल्ल्म में हुआ, उसके बाद वैसा ही धमाका कर्नाटक के मैसूर में अगस्त में किया गया। सितंबर में इसी तरह का आइईडी धमाका आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिला अदालत की पार्किंग में हुआ।

