कथित रेप पीड़ित के गर्भपात कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक मेडिकल बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है। कोर्ट ने केईएम मेडिकल कॉलेज मुंबई से कहा है कि बोर्ड द्वारा महिला की शनिवार को जांच की जाए जिसकी रिपोर्ट सोमवार को कोर्ट में जमा की जाए। उसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि गर्भपात करा पाना संभव है या नहीं। कोर्ट एक महिला की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें महिला अपनी 24 हफ्ते के गर्भ को गिराना चाहती जो कानूनी रूप से गैर कानूनी है। इसमें उसकी जान को खतरा भी हो सकता है। 26 वर्षीय रेप पीड़िता ने इस गर्भपात की इजाजत लेने के लिए ही सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

इस भ्रूण के जन्म लेने में दिक्कत बताई जा रही है जिससे मां और बच्चे दोनों के जीवन को खतरा हो सकता है। जस्टिस जेएस खेहर ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के सहायक और महाराष्ट्र स्टेट काउन्सल को भी सुनवाई के दौरान मौजूद रहने का हुक्म सुनाया है। महिला ने मेडिकल टरमिनेशन प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट को कोर्ट में चुनौती दी है। जिसके तहत कोई महिला 20 हफ्ते पुराने गर्भ को नहीं गिरा सकती चाहे भ्रूण और उसकी जान खतरे में ही क्यों ना हो। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया है कि भ्रूण ऐनिन्सेफली की बीमारी से पीड़ित है। यह एक बेहद गंभीर बिमारी है जिसमें बच्चा बिना मस्तिष के पैदा होता है। इस केस में भ्रूण का पेट का बाहरी हिस्सा नहीं बना है जिस कारण उसकी आंत बाहर बन रही है। जिसके चलते मां और बच्चे दोनों के जीवन संकट में बताया जा रहा  है।