बंबई हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के लोकायुक्त की मनमाने ढंग की कार्यप्रणाली पर हैरत जाहिर करते हुए इसके प्रमुख को चेतावनी दी है कि अगर वह अदालत के आदेशों का पालन करने में असफल रहते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया जा सकता हैै। न्यायमूर्ति सीएम कानाडे और न्यायमूर्ति शालिनी फणसालकर जोशी की खंडपीठ को जब बताया गया कि लोकायुक्त एमएल तहलियानी उस मामले में सुनवाई कर रहे हैं और आदेश भी पारित कर रहे हैं, जिसमें हाई कोर्ट ने ऐसा कुछ भी नहीं करने का निर्देश दे रखा है, तो इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जताई। पीठ ‘दी मिडल इनकम ग्रुप कोआॅपरेशन हाउसिंग सोसाइटी बांद्रा ईस्ट ग्रुप लिमिटेड’ द्वारा दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में लोकायुक्त के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें लोकायुक्त ने महाराष्ट्र आवास तथा विकास प्राधिकरण (म्हाडा) को निर्देश दिया था कि वह उपनगरीय बांद्रा इलाके में स्थित जर्जर इमारत के निवासियों को निकाले जाने के मामले में कोई कार्रवाई न करे। लोकायुक्त ने यह आदेश यहां के कुछ निवासियों की शिकायत के आधार पर दिया था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि कानून सम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना उन्हें वहां से निकाला जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल छागला (जो खुद भी इसी इमारत में रहते हैं लेकिन वे यह स्थान छोड़कर कहीं ओर जाने को तैयार हैं ने) तर्क दिया कि महाराष्ट्र लोकायुक्त तथा उप लोकायुक्त अधिनियम, 1971 के तहत लोकायुक्त को अंतरिम आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है। म्हाडा की ओर से पेश अधिवक्ता विश्वजीत सावंत ने हाई कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं (जो इमारत में रहने वाले लोग ही हैं) को कारण बताओ नोटिस जारी करने में प्राधिकरण को कम से कम आठ हफ्तों का समय लगेगा। फिर उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाएगा और उसके बाद ही कोई आदेश पारित किया जाएगा। चार अगस्त को हाई कोर्ट ने लोकायुक्त के समक्ष लंबित इस मामले में सुनवाई और मामले के अंतिम निस्तारण पर रोक लगा दी थी।
चार अगस्त को हाई कोर्ट ने कहा था, ‘प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि अधिनियम के किसी भी नियम के तहत अंतरिम आदेश पारित करना, जनता और सरकार को कुछ काम करने का निर्देश देना या फिर उन्हें कोई काम करने देने से रोकना लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। इस विवादस्पद आदेश पर रोक लगाई जाती है।’ हालांकि याचिकाकर्ताओं द्वारा 26 अगस्त को न्यायालय को बताया गया कि इस आदेश के बावजूद लोकायुक्त मामले में आदेश दे रहे हैं। न्यायमूर्ति कानाडे ने कहा, ‘इस व्यवहार से हमें हैरत हो रही है। क्या लोकायुक्त यह नहीं जानते हैं कि वे हाई कोर्ट के तहत आते हैं? यह अवमानना है। हम उनके खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करेंगे। जिस मामले पर हमने रोक लगा रखी है उस पर वे कैसे सुनवाई कर रहे हैं औैर कैसे आदेश पारित कर सकते हैं।’ अब इस मामले की सुनवाई एक सितंबर को होगी। न्यायालय ने कहा, ‘हम यह बात फिर से दोहरा रहे हैं कि जब तक यह याचिका लंबित है, तब तक इस मामले में लोकायुक्त की ओर से कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी।’

