महाराष्ट्र के विदर्भ के जंगलों में दहशत का पर्याय बनी बाघिन अवनी को शनिवार को यवतमाल जिले में मार गिराया गया। बाघिन अवनी (5) को ढूंढ़ने के लिए वन विभाग की टीम के साथ ही कैमरों, ड्रोन, हैंग ग्लाइडर और खोजी कुत्तों की मदद ली गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, टी1 के रूप में पहचानी गई अवनी को कम से कम 13 लोगों को शिकार बनाने का जिम्मेदार माना गया था। हालांकि, परीक्षण के बाद सभी मौतों की वजह उसे नहीं माना गया। एक स्वस्थ बाघिन अवनी तिपेश्वर टाइगर सैंक्चुरी में 10 महीने के अपने दो शावकों की परवरिश करती थी। उसे निशानेबाज नवाब असगर अली खान ने मार गिराया। उसके शव को परीक्षण के लिए नागपुर भेज दिया गया है। उसके शावक लापता हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के निदेर्शो के मुताबिक, वन विभाग और अधिकारियों को पहले उसे शांत करने और फंसाने की आवश्यकता थी, लेकिन शनिवार के अभियान के दौरान बाघिन ने टीम पर हमला कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अवनि को उसके दो बच्चों के साथ पहली बार 2012 में यवतमाल के जंगलों में देखा गया था. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो सालों में अवनि ने 14 इंसानों को मारकर खाया है।
वन्यजीव कार्यकर्ता और मेडिको जेरील ए. बनाइत जिन्होंने एनजीओ अर्थ ब्रिगेड फाउंडेशन (ईबीएफ) के साथ संयुक्त रूप से जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा कि अवनी को मारने में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के नियमों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया गया है।
उन्होंने कहा, “इस तरह के एक ऑपरेशन को केवल सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच ही किया जा सकता है, एनटीसीए के दिशानिर्देशों के अनुसार, आज तड़के अवनी को मारने के दौरान कोई भी पशु चिकित्सक या पुलिस मौजूद नहीं था। रात में किसी भी बाघ के लिंग की पहचान करना लगभग असंभव है।”

