केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि सरकार जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवाद बर्दाश्त नहीं करेगी और आतंकवादियों को मार भगाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में शांति बहाल करना मोदी सरकार के शीर्ष एजेंडे में शामिल है। लखनऊ से लोकसभा सांसद राजनाथ ने मोदी सरकार के जम्मू एवं कश्मीर से आतंकवादी गतिविधियों के पूर्ण रूप से समाप्त करने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने एक निजी अस्पताल के समारोह से इतर कहा कि आतंकवादी संगठनों को किसी भी तरह की अप्रिय घटना को लेकर चेतावनी दी और कहा कि सुरक्षाबल ऐसे किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए तैयार है। गृहमंत्री ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब एक दिन पहले ही भाजपा ने जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवाद की बढ़ती घटना का हवाला देकर पीडीपी नीत सरकार से अपना नाता तोड़ लिया था।
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की मंजूरी के बाद जम्मू एवं कश्मीर में बुधवार को राज्यपाल शासन लागू हो गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से गठबंधन तोड़ने के फैसले के बाद व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद राज्यपाल एन.एन. वोहरा ने मंगलवार को कोविंद की मंजूरी मांगी। वोहरा जम्मू एवं कश्मीर के संविधान के प्रावधानों के तहत राज्यपाल शासन को लागू करने की सिफारिश की, जो राज्य में छह महीने तक राज्यपाल शासन रहने की मंजूरी देता है।
अगर एक निर्वाचित सरकार छह महीने की अवधि के भीतर सत्तारूढ़ रहने में विफल रहती है, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। जम्मू-कश्मीर का अपना संविधान है जो भारतीय संविधान के साथ मिलकर चलता है। यह चौथी बार है कि वोहरा राज्य प्रशासन के मामलों को सीधे देखेंगे। वोहरा का कार्यकाल 25 जून को खत्म हो रहा था, लेकिन कोविंद ने वोहरा के कार्यकाल की अवधि तीन महीने तक बढ़ा दी।
