लोकसभा में बुधवार को संविधान (123वां) संशोधन विधेयक 2017 पेश किया गया जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी विधेयक में राज्यसभा द्वारा किए गए संशोधनों के स्थान पर वैकल्पिक संशोधनों का प्रस्ताव किया गया है। निचले सदन में सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने संविधान (123वां) संशोधन विधेयक पेश करते हुए कहा कि इस विधेयक में राज्यसभा में पारित संशोधनों के स्थान पर वैकल्पिक संशोधन लाए गए हैं। उन्होंने खंड एक में वर्ष 2017 के स्थान पर 2018 किए जाने का भी प्रस्ताव किया। गहलोत ने कहा कि आयोग में एक महिला सदस्य संबंधी प्रावधान को संशोधन में शामिल नहीं किया गया है लेकिन नियमों में इसे शामिल किया जाएगा। अल्पसंख्यक सदस्य संबंधी राज्यसभा के संशोधन के बारे में उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए अलग-अलग आयोग हैं और पिछड़े वर्गों में समाज के सभी वर्गो के लोग आते हैं। इसमें कहा गया है कि भारत के संविधान और संशोधन करने वाले विधेयक जो लोकसभा द्वारा पारित किया जा चुका है और इसमें राज्यसभा द्वारा किए गए संशोधन के तहत पृष्ठ 2 और 3, खंड 3 का लोप किया जाए। इसके स्थान पर वैकल्पिक संशोधन को प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है।
इसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 338क के बाद नया अनुच्छेद 33ख की अंत: स्थापन की जाएगी। 338ख (1) सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग नामक एक आयोग होगा। संसद द्वारा इस निमित्त बनाई गई किसी विधि उपबंधों के अधीन आयोग में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व तीन सदस्य होंगे और इस प्रकार नियुक्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तों और पदावधि ऐसी होंगी जो राष्ट्रपति नियमों में स्पष्ट करेंगे। आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्य राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त किए जाएंगे।
आयोग को अपनी स्वयं की प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी। विधेयक में आयोग के कर्तव्यों में कहा गया है कि वह संविधान के अधीन या किसी अन्य विधि के अधीन या सरकार के किसी आदेश के अधीन सामाजिक व शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा से संबंधित सभी मामलों की जांच व निगरानी करेगा। वह सामाजिक व शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के अधिकारों से वंचित किए जाने और उनके हितों की रक्षा के उपायों के संबंध में शिकायतों की जांच करेगा।
यह विधेयक 10 अप्रैल, 2017 को लोकसभा में पारित किया गया था। इसे बाद में राज्यसभा में भेजा गया था। राज्यसभा ने 31 जुलाई, 2017 को हुई बैठक में विधेयक को संशोधनों के साथ पारित किया और इसे 1 अगस्त, 2017 को लोकसभा को लौटा दिया गया था।

