पाकिस्तान पोषित आतंकवादी संगठनों- लश्कर ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश ए मुहम्मद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और आतंकवादी सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रतिबंधित कराए जाने की भारत की कवायद का फ्रांस ने साथ दिया है। इन मसलों पर फ्रांस और भारत मिलकर काम करेंगे। अजहर के मुद्दे पर भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा, ‘इस पर क्या हो सकता है, इस बारे में हम भारत से चर्चा करेंगे। यह पेरिस में होने वाले आतंक निरोध पर हमारे द्विपक्षीय कार्यकारी समूह का एजंडा होगा। भारत जानता है कि वह हमारे समर्थन पर भरोसा कर सकता है।’ जैश ए मुहम्मद के सरगना मसूद के मामले में चीन की आपत्ति को लेकर फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां मार्क एरॉल्ट ने कहा कि सभी देशों को अपने क्षेत्र या अपने नियंत्रण वाले इलाकों से पैदा होने वाले आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी रूप से लड़ना चाहिए। चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि हम भारत को निशाना बनाने वाले आतंकी समूह खासकर लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत निर्णायक कार्रवाई होते देखना चाहते हैं। एरॉल्ट ने फ्रांस और भारत के बीच आतंक से लड़ाई में सहयोग बढ़ाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फ्रांस और भारत दोनों ही आतंक से पीड़ित हैं और इसके खिलाफ आमने-सामने की लड़ाई में दोनों देश एक हैं।
‘वाइब्रेंट गुजरात’ सम्मेलन में शामिल होने चार दिवसीय दौरे पर भारत आए फ्रांस के विदेश मंत्री ने लक्षित हमलों को लेकर कहा कि आतंकवाद को कोई भी तर्क न्यायसंगत नहीं ठहरा सकता। इससे हर जगह समान प्रतिबद्धता से लड़ना चाहिए। जब देश को इस किस्म के आतंकी खतरे का सामना करना पड़ता है तो उसे अपनी रक्षा करने का अधिकार भी है। आतंकी सरगना मसूद अजहर पर पाबंदी लगाने की कोशिशों पर चीन के वीटो के बारे में उन्होंने कहा, ‘हम इसकी भर्त्सना करते हैं। हमारे संयुक्त प्रयासों और समिति से मिले भरपूर समर्थन के बावजूद सर्वसम्मति नहीं बन सकी।’ उन्होंने कहा कि जैश ए मोहम्मद का नाम संयुक्त राष्ट्र की आतंकी संगठनों की सूची में पहले से शामिल है। इसलिए इसके प्रमुख को इस सूची में शामिल करने के पक्ष में मजबूत तर्क मौजूद हैं। भारत का अनुरोध बिल्कुल जायज है। उन्होंने कहा कि इसीलिए फ्रांस ने इस अनुरोध का न केवल समर्थन किया, बल्कि इसका सह-प्रस्तावक भी बना। चीन का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को आतंक के खिलाफ एक जैसी प्रतिबद्धता से लड़ना चाहिए।’
एरॉल्ट ने कहा कि वर्ष 1998 से हमारे बीच रणनीतिक साझेदारी है। सर्वाधिक संवेदनशील विषयों मसलन रक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, आतंकनिरोध पर सहयोग के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश सुरक्षा से जुड़े अन्य मामलों, मसलन साइबरस्पेस के क्षेत्र में भी सहयोग करते हैं। इसके अलावा दोनों देशों के समुद्रीय सुरक्षा और हिंद महासागर में सहयोग को लेकर साझा एजंडा है।

