विदेश मंत्रालय एक ऐसा पोर्टल बना रहा है, जिस पर फरार एनआरआइ पतियों के खिलाफ जारी समन और वारंट तामील किए जाएंगे। आरोपी एनआरआइ अगर इस पर कोई जवाब नहीं देता, तो उसे वांछित अपराधी घोषित कर उसकी संपत्ति जब्त की जाएगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को यह एलान किया। उन्होंने कहा कि इस तरह का पोर्टल तैयार करने के लिए भारतीय दंड विधान में संशोधन किया जाएगा। इस संशोधन के तहत जिला अधिकारियों को यह अधिकार होगा कि पोर्टल पर जारी (अपलोड) वारंट और समन को ‘तामील किया गया’ मानकर कार्रवाई करें।
नए प्रावधान के तहत जब्त संपत्ति की नीलामी कर मिला धन पीड़िता को दिया जाएगा। एनआरआइ विवाह और महिलाओं व बच्चों की तस्करी के विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में सुषमा स्वराज ने बताया कि हम अगली कैबिनेट बैठक में संशोधन प्रस्ताव पेश करने कर संसद के अगले सत्र में इसे पारित कराने का प्रयास करेंगे। विदेश मंत्री ने बताया कि इस आशय के प्रस्ताव पर विधि मंत्रालय, राज्य सरकारें, केंद्रीय गृह मंत्रालय और महिला व बाल विकास मंत्रालय ने सहमति जताई है। इसका मकसद ऐसे एनआरआइ विवाहों को रोकना है, जिसमें पति अपनी पत्नियों का परित्याग कर देते हैं और फरार हो जाते हैं। या फिर शादी के बाद साथ ले जाते हैं और परदेस में उनका मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न करते हैं।
विदेश मंत्रालय को अपने एनआरआइ पतियों से परेशान भारतीय महिलाओं की ओर से पिछले तीन साल (जनवरी 2015 से नवंबर 2017) में ऐसी 3,328 शिकायतें मिली हैं। इनमें से अधिकांश मामलों में पतियों ने महिलाओं को छोड़ दिया है। धोखाधड़ी के इरादे से की गई इस तरह की शादियों को ही रोकने के मकसद से मंत्रालय का यह पोर्टल बनाने की योजना तैयार की गई, जहां एनआरआइ पतियों के खिलाफ समन और वारंट को तामील समझा जाएगा और अगर आरोपी इसका जवाब नहीं देता है तो उसे वांछित अपराधी घोषित कर उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।
एनआरआइ विवाहों पर गठित विशेषज्ञ पैनल ने वेबसाइट के जरिए विदेशों में रहने वाले भारतीयों को समन जारी करने और समन के बाद भी हाजिर नहीं होने पर उन्हें भगोड़ा अपराधी घोषित कर उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए कानूनों में बदलाव की सिफारिश की थी। पंजाब एनआरआइ आयोग के पूर्व अध्यक्ष न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) अरविंद गोयल की अध्यक्षता में 2016 में गठित इस पैनल ने पिछले साल अगस्त में विदेश मंत्रालय को अपनी सिफारिशें सौंपी थीं।
देशभर में ऐसे मामलों के निपटारे के लिए विदेश मंत्रालय में एकल खिड़की प्रणाली के तहत इंतजाम किया जा रहा है। इसके साथ ही देश के सभी राज्य महिला आयोग इस प्रणाली से जुड़ जाएंगे। उनकी जांच रिपोर्ट पर ही यह मंत्रालय मामले को दूसरे मुल्क में वहां की न्यायिक व्यवस्था के मुताबिक आगे बढ़ाएगा। कई केसों में देखा गया है कि विवाह के बाद लड़का यह कहकर विदेश चला गया कि वह दो-तीन माह में पत्नी को वहां बुला लेगा। कुछ मामलों में विवाहिता साथ तो चली गई, लेकिन विदेश में उसे प्रताड़ना झेलनी पड़ी। विदेश में उसकी मदद करने वाला कोई नहीं होता। वहां के कानून की जटिलताएं भी पीड़िता को बेबस होने के लिए मजबूर कर देती है। अगर साथ में बच्चा भी है तो महिला के लिए दिक्कतें और अधिक बढ़ जाती हैं।
कसी जाएगी कानूनी नकेल
’पोर्टल पर समन-वारंट जारी कर होगी कार्रवाई ’विदेश मंत्रालय बना रहा वेब पोर्टल, कानून में संशोधन प्रस्ताव तैयार ’अपलोड किए गए समन पर हाजिर नहीं हुए तो जब्त होगी संपत्ति ’जब्त संपत्ति को नीलाम कर मिला धन पीड़िता को दिया जाएगा ’विदेश गई पीड़िता का वहां के कानून के मुताबिक मुकदमा लड़ेगी सरकार

