मध्य प्रदेश में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल उज्जैन में शनिवार को हुई एक घटना से प्रशासन की जमकर फजीहत हुई। दरअसल शनिश्चरी अमावस्या के मौके पर हजारों श्रद्धालु क्षिप्रा नदी में स्नान के लिए पहुंचे थे लेकिन पानी नहीं होने की वजह से कीचड़ का पानी छिड़क कर लौटने पर मजबूर हो गए। श्रद्धालुओं की नाराजगी सामने आने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

दो-दो लापरवाहियों ने कराई किरकिरीः गौरतलब है कि शनिश्चरी अमावस्या के मौके पर उज्जैन स्थित त्रिवेणी घाट पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ी थी। सरकार पहले तो क्षिप्रा तक पानी लाने में विफल रही। इसके बाद नदी में पानी नहीं होने के चलते प्रशासन ने फव्वारे लगाए थे लेकिन उनमें भी ज्यादातर बंद निकले। फव्वारे चलाने के लिए स्टापडेम से पाइपलाइन डाली गई थी लेकिन लाइन से जुड़ी मोटर बंद हो गई। ऐसे में निराश लोगों ने बचे-खुचे कीचड़ से सने पानी को छिड़क कर पारंपरिक स्नान की औपचारिकता पूरी की।

अब शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का खेलः कड़ी फजीहत के बाद प्रशासनिक अमलों ने दूसरे महकमों पर जिम्मेदारी डालने का काम शुरू कर दिया है। पीएचई के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ने कहा कि नर्मदा वैली डेवलपमेंट अथॉरिटी (एनवीडीए) को 20 दिन पहले पत्र भेजा था और तीन दिन पहले दोबारा पत्र भेजा था। गुरुवार को केवल 80 एमसीएफटी पानी छोड़ा गया जो रास्ते में ही खत्म हो गया। वहीं नर्मदा-क्षिप्रा लिंक प्रोजेक्ट के अधिकारी ने कहा- ‘हमारा काम आदेश जारी करना है। नदी में पानी डालने के बाद की व्यवस्था नगरीय निकायों की है।’