आरबीआइ और वित्त मंत्री के दावे से विपरीत नकदी का संकट समय बीतने के साथ लगातार बढ़ता जा रहा है। अब ज्यादातर बैंकों की हालत भी एटीएम जैसी हो गई है। जिन्हें पहले थोड़ी बहुत रकम तो मिल जाती थी, वह भी अब बंद हो चुकी है। मुख्य शाखाओं से नकदी लाने की उम्मीद में शहर के करीब एक दर्जन से ज्यादा बैंक शाखाओं के प्रबंधक गुरुवार को लगे रहे लेकिन उन्हें रुपए नहीं मिले। गुरुवार को सेक्टर- 6 के केनरा बैंक, यूनियन बैंक, विजया बैंक, सेक्टर- 62 के एचडीएफसी बैंक, निठारी के जिला सहकारी बैंक के अलावा सेक्टर-18 की बैंक शाखाओं में कतई नकदी नहीं पहुंची। इन बैंकों के बाहर लाइन केवल पुराने नोटों को खाते में जमा कराने वालों की लगी रही। इस मामले पर बैंकिंग प्रणाली के जानकारों का कहना है कि नकदी की उतनी ज्यादा कमी नहीं है, जितनी दिखाई दे रही है। अलबत्ता लगातार निकासी होने और नए नोटों के जमा नहीं होने से स्थिति बेकाबू हो रही है। जरूरत के मुताबिक, नए नोट होने के बावजूद लोगों की ज्यादा से ज्यादा जमा करने की नियत भी इसके लिए जिम्मेदार है। हालांकि लगातार दो दिनों से एटीएम के अलावा बैंकों में भी नकदी की कमी से वेतन भोगी कर्मचारी और फैक्ट्रियों के मजदूर परेशान हैं। उनके खातों में पिछले दिनों पहले ही फैक्ट्री संचालकों ने भेजी है।
गुरुवार को शहर की तकरीबन 50 फीसद बैंक शाखाओं में करंसी नहीं थी। बैंकों के बाहर कतारें केवल 500 और 1 हजार रुपए के पुराने नोट जमा कराने वालों की थी। जिन 50 फीसद शाखाओं में कुछ नकदी आई थी, वहां भी दोपहर से पहले ही नकदी खत्म होने का नोटिस चस्पा कर दिया गया। एटीएम बूथों की स्थिति भी ऐसी ही रही।
बैंक प्रबंधकों के अनुसार एटीएम मशीनों को नए नोटों के हिसाब से नहीं सुधारा जा सका है। इस वजह से ज्यादातर में 100 के नोट भरने से वह महज 2-3 घंटों में खाली हो रहे हैं। जबकि करीब 50 फीसद एटीएम मशीनों को अभी तक सही तरह से मुख्य सर्वर से जोड़ा नहीं जा सका है। ये मशीनें नोटबंदी के पहले दिन से महज ढाचे के रूप में हैं। मुख्य शाखाओं को 20 लाख रुपए और छोटी शाखाओं को 5 लाख रुपए तक नकदी मिल रही थी। यह आंकड़ा भी पिछले दो दिनों से गड़बड़ा गया है।

