केंद्र ने वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के प्रतिनियुक्ति के आग्रह को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि सेवा नियम इस तरह की नियुक्ति की इजाजत नहीं देते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने कार्यालय में चतुर्वेदी को ओएसडी के रूप में तैनात करना चाहते थे। इसने कहा कि दिल्ली सरकार में जाने से पहले चतुर्वेदी को तीन साल के आवश्यक ‘कूलिंग आॅफ’ की अवधि को पूरा करने की आवश्यकता है।
उत्तराखंड कैडर के 2002 बैच के भारतीय वन सेवा के अधिकारी चतुर्वेदी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उपसचिव के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने पिछले साल दिल्ली सरकार में अंतर कैडर नियुक्ति मांगी थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पिछले साल 16 फरवरी को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिख कर अपने कार्यालय में ओएसडी के रूप में चतुर्वेदी की सेवाएं मांगी थीं।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से हाल में जारी आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने चतुर्वेदी की उत्तराखंड कैडर से दिल्ली सरकार में अंतर कैडर नियुक्ति के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। यह फैसला केंद्रीय प्रशासनिक पंचाट द्वारा दो जून को दिए गए उस आदेश के बाद आया है जिसमें एसीसी को अधिकारी की बाकी पेज 12 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 12
प्रतिनियुक्ति पर तीन हफ्ते के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया गया था।
सेवा में लिए जाने के बाद चतुर्वेदी को हरियाणा कैडर आबंटित किया गया था। हालांकि उन्होंने अत्यंत निजी कठिनाई का हवाला देते हुए अपना कैडर बदले जाने की मांग की थी। एसीसी ने अगस्त, 2015 में हरियाणा से उत्तराखंड में उनके अंतर कैडर स्थानांतरण को मंजूरी दे दी थी। हालांकि इस साल फरवरी में उत्तराखंड सरकार ने अंतर कैडर प्रतिनियुक्ति के लिए चतुर्वेदी का अनापत्ति प्रमाणपत्र मांगने का आग्रह यह कह कर खारिज कर दिया था कि यदि भारत सरकार ‘कूलिंग आॅफ’ शर्त में छूट देती है तो अंतर कैडर प्रतिनियुक्ति पर उत्तराखंड को कोई आपत्ति नहीं है।
नियमों के मुताबिक कोई भी अधिकारी तभी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति या अंतर कैडर प्रतिनियुक्ति हासिल कर सकता है जब उसे दोनों संबद्ध राज्य सरकार (अधिकारी का कैडर राज्य) और केंद्र से अनुमति हो। इसके अतिरिक्त अधिकारी को दो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अवधि के बीच ‘कूलिंग आॅफ’ अवधि को भी पूरा करना चाहिए। चतुर्वेदी का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति कार्यकाल 28 जून को पूरा हो रहा है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पूर्व में एसीसी को सूचित किया था कि चतुर्वेदी को अभी अपने नए मूल कैडर उत्तराखंड में सेवा देनी है।
मंत्रालय ने आगे कहा था कि राज्य दर राज्य के हिसाब से अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक स्थितियों के चलते अधिकारी के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने कैडर की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के क्रम में अपने करियर के निर्माणात्मक चरण में खुद को अपने कैडर की मांग और बाधाओं से अवगत कराए। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 16 जून के अपने हालिया पत्र व्यवहार में कहा था कि क्योंकि उत्तराखंड सरकार ने अपनी सहमति नहीं दी है और अधिकारी की अगली प्रतिनियुक्ति पर विचार किए जाने से पहले उसे अपने कैडर में ‘कूलिंग आॅफ’ अवधि को आवश्यक रूप से पूरा करना है। चतुर्वेदी की उत्तराखंड से दिल्ली सरकार में अंतर कैडर प्रतिनियुक्ति पर विचार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली एसीसी ने मंगलवार को जारी अपने आदेश में चतुर्वेदी की अंतर कैडर प्रतिनियुक्ति को खारिज कर दिया।